रोज 10 बीड़ी पीने से आया स्ट्रोक, दिव्यांग पेंशन की मांग रहे पूर्व सैनिक से बोला सुप्रीम कोर्ट
अपीलकर्ता सर्वेश कुमार को ब्रेन स्ट्रोक आया था। ऐसे में वह यह दावा कर दिव्यांग पेंशन की मांग कर रहे थे कि उनकी ऐसी स्थिति सैन्य सेवा के चलते हुई है। उनकी याचिका को AFT ने खारिज कर दिया था। शीर्ष न्यायालय मेडिकल रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की राय पर गौर किया।

दिव्यांग पेंशन की याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पूर्व सैनिक को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष न्यायालय ने याचिकाकर्ता की हालत की वजह रोज 10 बीड़ी पीना बताया है। AFT यानी आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल में याचिका खारिज होने के बाद पूर्व सैनिक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अदालत ने ट्रिब्यूनल के फैसले में बदलाव से इनकार कर दिया है और अपील खारिज कर दी है।
शीर्ष न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता को ब्रेन स्ट्रोक सैन्य सेवा से नहीं, बल्कि रोज 10 बीड़ी पीने की वजह से आया है। याचिका पर जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मुआवजा नहीं दिया जा सकता, जहां दिव्यांगता किसी व्यक्ति के अपने नियंत्रण की चीज से पैदा हुई हो। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने पेंशन रेग्युलेशन को देखकर फैसला दिया है।
पूरा मामला यहां समझें
अपीलकर्ता सर्वेश कुमार को ब्रेन स्ट्रोक आया था। ऐसे में वह यह दावा कर दिव्यांग पेंशन की मांग कर रहे थे कि उनकी ऐसी स्थिति सैन्य सेवा के चलते हुई है। उनकी याचिका को AFT ने खारिज कर दिया था। शीर्ष न्यायालय मेडिकल रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की राय पर गौर किया। इनमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता को रोज 10 बीड़ी पीने की आदत थी।
क्या बोला सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हमने पाया कि ट्रिब्यूनल ने 'पेंशन रेगुलेशन फॉर द आर्मी, 1961' के नियम 173 और 'गाइड टू मेडिकल ऑफिसर्स, 2002' के पैरा 6 पर ध्यान दिया है। ये नियम स्पष्ट करते हैं कि यदि कोई विकलांगता या मृत्यु शराब, 'तंबाकू' या नशीली दवाओं के अत्यधिक सेवन या यौन संचारित रोगों के कारण होती है, तो उसके लिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये चीजें व्यक्ति के स्वयं के नियंत्रण में होती हैं।'
अदालत ने कहा, 'वर्तमान मामले में, पहली मेडिकल रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की राय को गौर से देखने के बाद, हमारे मन में कोई संदेह नहीं रह गया है कि 'स्ट्रोक इस्केमिक आरटी एमसीए टेरिटरी' (Stroke Ischemic RT MCA TERRITORY) नामक बीमारी न तो सैन्य सेवा के कारण हुई थी और न ही सेवा की वजह से बढ़ी थी। हम ऐसा बहुत ही सरल कारण से कह रहे हैं कि दोनों रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि अपीलकर्ता को बीड़ी पीने की आदत थी, और वह भी दिन में दस बीड़ी।'
कोर्ट ने कहा कि मेडिकल साइंस के अनुसार, इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है, जब खून का थक्का या फैटी प्लाक ब्लॉक्स दिमाग तक खून पहुंचाने वाली आर्टरी को ब्लॉक कर देता है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान एक रिस्क फैक्टर है। ऐसे में कोर्ट ने पाया कि AFT के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है और अपील को खारिज कर दिया।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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