AI से ऐसी याचिका बनवा लाया वकील कि भड़के चीफ जस्टिस, भरी अदालत में टेस्ट लिया और फेल
सुप्रीम कोर्ट का मजेदार किस्सा! 12वीं पास याचिकाकर्ता ने AI और '4 जैकेट' की रिश्वत से लिखवाई PIL! जानें कैसे CJI सूर्यकांत ने 'इंग्लिश टेस्ट' की धमकी देकर खोली पोल।

सुप्रीम कोर्ट के कटघरे में वैसे तो हमेशा बेहद गंभीर और कानूनी दांव-पेंच वाले मुद्दे सुने जाते हैं, लेकिन हाल ही में एक ऐसा मजेदार और दिलचस्प वाकया सामने आया, जो किसी कॉमेडी फिल्म के सीन से कम नहीं था। मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा था, जिसकी भारी-भरकम अंग्रेजी और कानूनी शब्दावली देखकर चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत को शक हो गया कि दाल में कुछ काला है। आइए आपको तफ्सील से बताते हैं कि कैसे एक 12वीं पास याचिकाकर्ता की पोल सुप्रीम कोर्ट में खुल गई।
"मैंने खुद लिखी है याचिका, चाहो तो फोन रख लो"
मामले की शुरुआत तब हुई जब सीजेआई सूर्यकांत के सामने एक PIL आई। याचिका की ड्राफ्टिंग और उसमें इस्तेमाल की गई अंग्रेजी इतनी हाई-लेवल थी कि सीजेआई को तुरंत शक हुआ। उन्होंने याचिकाकर्ता से सीधा सवाल किया- क्या यह याचिका आपने खुद ड्राफ्ट की है? याचिकाकर्ता भी पूरे कॉन्फिडेंस में था। उसने तुरंत हामी भरते हुए कहा- जी बिल्कुल, मैंने खुद की है। आप चाहें तो जांच के लिए मेरा फोन यहां जमा कर सकते हैं।
सीजेआई का बाउंसर: 30 नंबर का लाइव इंग्लिश टेस्ट!
सीजेआई ने जब याचिकाकर्ता की शैक्षणिक योग्यता पूछी, तो उसने बताया कि वह सिर्फ 12वीं पास है और उसने अपनी पढ़ाई लुधियाना के सनातन धर्म स्कूल से की है। एक 12वीं पास शख्स द्वारा इतनी क्लिष्ट अंग्रेजी में याचिका ड्राफ्ट करने की बात सीजेआई को हजम नहीं हुई। उन्होंने एक मजेदार शर्त रख दी। उन्होंने कहा- मैं अभी इसी कोर्ट रूम में तुम्हारा अंग्रेजी का एक टेस्ट करवाता हूं। अगर तुम उसमें सिर्फ 30 नंबर भी ले आए, तो मैं मान लूंगा।
याचिकाकर्ता अभी भी आत्मविश्वास से भरा था और बोला- जी हां, मैं टेस्ट दे सकता हूं। लेकिन सीजेआई ने सख्ती दिखाते हुए आखिरी चेतावनी दी- या तो अभी सच बता दो, वरना मैं तुम पर भारी जुर्माना लगाऊंगा और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दूंगा।
'फिड्यूशरी रिस्क' ने खोल दी पोल
झूठ पकड़ने के लिए सीजेआई ने याचिका के ही एक पन्ने से एक बेहद भारी-भरकम कानूनी वाक्य उठाया और पूछा, 'तुमने जो अपनी याचिका में 'fiduciary risk to corporate donors' लिखा है, जरा मुझे इसका मतलब समझा दो? इस सवाल ने याचिकाकर्ता की बोलती बंद कर दी। जब वकील ने बीच-बचाव कर याचिका का संदर्भ देने की कोशिश की, तो सीजेआई ने कड़क आवाज में कहा, 'मैं आखिरी बार पूछ रहा हूं कि यह ड्राफ्ट किस वकील ने बनाया है? तुमने तो यह बिल्कुल नहीं किया है।'
क्लाइमेक्स: 4 जैकेट, 1000 रुपए घंटा और 'दास सर'
आखिरकार सच जुबान पर आ ही गया और जो खुलासा हुआ, उसने पूरे कोर्ट रूम का माहौल बदल दिया। याचिकाकर्ता ने कबूल किया कि उन्होंने इसे खुद नहीं लिखा है बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल्स की मदद ली है। लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट अभी बाकी था! उन्होंने बताया कि इस याचिका को टाइप करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ही एक टाइपिस्ट (दास सर) की मदद ली थी। और इसके बदले में क्या दिया? 1000 रुपये प्रति घंटा की फीस और तोहफे में 4 शानदार जैकेट!
उस टाइपिस्ट को यहां बुलाओ...
यह सुनते ही कोर्ट रूम में हैरानी और हंसी का मिला-जुला माहौल बन गया। सीजेआई भी इस गजब की 'जुगाड़ टेक्नोलॉजी' को देखकर हैरान रह गए कि सुप्रीम कोर्ट के ही टाइपिस्ट ने यह याचिका तैयार की है। मामले का अंत सीजेआई के इस मजेदार लेकिन सख्त आदेश के साथ हुआ- सुप्रीम कोर्ट के टाइपिस्ट ने यह याचिका बनाई है? बुलाओ उस टाइपिस्ट को यहां!
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और फैसला
चीफ जस्टिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने एक मनगढ़ंत और अस्पष्ट याचिका दायर करने के लिए किसी और को अपना कंधा उधार दिया है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका का लहजा और उसमें उठाए गए संवैधानिक सिद्धांत किसी छोटे व्यापारी के दिमाग की उपज नहीं हो सकते।
कोर्ट ने इस मामले में कोई बड़ी जांच बिठाने से इनकार कर दिया। याचिका को खारिज कर दिया गया। CJI ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा- हम इस बेतुकी याचिका के लिए जांच का आदेश तो नहीं दे रहे हैं, लेकिन आपको चेतावनी देते हैं कि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दायर न करें। सुनवाई के अंत में माहौल को थोड़ा हल्का करते हुए चीफ जस्टिस ने उस शख्स को उसके व्यापार पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- वापस जाइए और कुछ और स्वेटर बेचिए। अगर आप इस तरह की जनहित याचिकाएं दाखिल करते रहेंगे, तो अंत में आपको भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
यह वाकया दिखाता है कि आज के दौर में AI का इस्तेमाल और जुगाड़ किस हद तक पहुंच गया है, लेकिन जब सामना सुप्रीम कोर्ट के जजों से हो, तो '4 जैकेट' की रिश्वत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी काम नहीं आते!
बता दें कि पिछले कुछ महीनों में CJI सूर्यकांत AI के इस्तेमाल पर पहले भी टिप्पणी कर चुके हैं। फरवरी में उन्होंने कहा था कि कुछ वकील AI से याचिकाएं ड्राफ्ट कर रहे हैं, जिसमें फर्जी केस लॉ (जैसे Mercy vs Mankind) का जिक्र किया जा रहा है, जो अलार्मिंग है। शायद इसीलिए इस PIL में भी AI का जिक्र आते ही CJI का रिएक्शन इतना तीखा रहा।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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