सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो मामले में 'भाषा' पर जताई नाराजगी, इलाहाबाद HC आदेश पर स्वत: संज्ञान

Feb 10, 2026 11:00 pm ISTDevendra Kasyap भाषा, नई दिल्ली
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उच्चतम न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के मामलों में टिप्पणियों को लेकर उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों के लिए दिशानिर्देशों पर विचार किया और कहा कि वह राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से इस पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो मामले में 'भाषा' पर जताई नाराजगी, इलाहाबाद HC आदेश पर स्वत: संज्ञान

उच्चतम न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के मामलों में टिप्पणियों को लेकर उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों के लिए दिशानिर्देशों पर विचार किया और कहा कि वह राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) से इस पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहेगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि वह यौन उत्पीड़न मामले में पारित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 17 मार्च, 2025 के आदेश को रद्द कर देगी। उस आदेश में, उच्च न्यायालय ने कहा था कि एक नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसके निचले वस्त्र को खींचने का प्रयास करना बलात्कार के प्रयास का अनुमान लगाने के लिए अपर्याप्त था।

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शीर्ष अदालत ने पूर्व में उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों पर गौर करने के बाद स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की। शीर्ष अदालत ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में असंवेदनशील न्यायिक टिप्पणियों का पीड़ितों, उनके परिवारों और समाज पर "गंभीर प्रभाव" पड़ सकता है। शीर्ष अदालत ने दिसंबर में कहा था कि वह इन मामलों में टिप्पणियां करने और ऐसे आदेश जारी करने के संबंध में उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करने पर विचार कर सकती है।

पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक ​​दिशानिर्देशों का सवाल है, वह एनजेए से एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने को कहेगी। सीजेआई ने कहा, "हम (उच्च न्यायालय के) आदेश को रद्द कर देंगे। हम राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से इस मुद्दे पर एक व्यापक रिपोर्ट बनाने के लिए कहेंगे।" मामले में उपस्थित अधिवक्ताओं में से एक ने कहा कि उन्होंने एक अर्जी दायर कर यह मुद्दा उठाया है कि ऐसे मामलों में अदालतों द्वारा उम्र के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा, ''जहां तक ​​दिशानिर्देशों का सवाल है, हम राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से कहने पर विचार कर रहे हैं। उन्हें एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने दीजिए।'' पीठ ने कहा कि यह एक अखिल भारतीय कवायद होनी चाहिए।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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