
ऐसे लड़कों को सबक… BMW हिट एंड रन मामले में SC का जमानत देने से इनकार; माता-पिता को भी सुनाया
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में मुंबई में हुए बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में आरोपी मिहिर शाह को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लड़कों को सबक मिलना जरूरी है। इसमें माता-पिता की भी गलती है, जो इन्हें बेहतर संस्कार नहीं दे पाए।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जुलाई 2024 के मुंबई बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में 24 वर्षीय आरोपी मिहिर शाह को जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी की जमानत याचिका पर अदालत ने कहा कि ऐसे लड़कों को सबक सिखाने की जरूरत है। इसके लिए माता-पिता भी जिम्मेदार हैं, जो अपने बच्चों के सही संस्कार नहीं दे पाए। पीठ ने यह भी नोट किया कि आरोपी एक संपन्न परिवार से आता है और उसके व्यवसायी पिता राजेश शाह, एकनाथ शिंदे की नेतृत्व वाली शिवसेना के पूर्व नेता रह चुके हैं।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने 21 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने कहा, "वह (आरोपी) क्या करता है? देर रात मर्सिडीज से घर आता है, उसे शेड में खड़ी करता है और फिर बीएमडब्ल्यू निकाल लेता है। उससे लोगों को टक्कर मारता है और फिर फरार हो जाता है। ऐसी हरकतों और ऐसे मामलों के चलते उसे जेल के अंदर ही रहने दीजिए।"
कोर्ट की टिप्पणी को ध्यान में रखते हुए आरोपी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने स्वीकार किया कि इस मामले में तथ्य कुछ हद तक असहज करने वाले हैं। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज हो जाने के बाद ही मिहिर शाह को फिर से जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी। इस पर पीठ ने सुझाव दिया, “ऐसे में आप याचिका वापस ले सकते हैं।” इसके बाद पीठ ने जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
क्या है मामला?
नाखवा पुलिस के मुताबिक जुलाई 2024 में मिहिर शाह मंबई के वर्ली सी-फेस रोड पर एक तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू से जा रहा था। इसी दौरान उसकी गाड़ी एक स्कूटर सवार दंपत्ति से टकरा गई। कथित तौर पर गाड़ी टकराने के बाद भी मिहिर लगातार गाड़ी चलाता रहा। इस दुर्घटना में पति तो बोनट से टकराकर अलग गिर गया, लेकिन पत्नी कार के साथ करीब 2 किलोमीटर तक घिसटती चली गई, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक गाड़ी मिहिर शाह ही चला रहा था, लेकिन परिवार ने अपने रसूख के चलते गाड़ी में मौजूद ड्राइवर पर दोष मढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने घटना के दो दिन बाद मिहिर को गिरफ्तार कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट ने अपराध की प्रवृ्त्ति, गंभीरता और आरोपी की हरकतों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसे बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
गौरतलब है कि मिहिर के ऊपर बीएनएस की धारा 105 के तहत मामला दर्ज है। इसमें अधिकतम सजा आजीवन कारावास की होती है।





