Hindi NewsIndia NewsSupreme Court delivers split verdict in plea against order for Hindu and Muslim police officers in SIT over Akola Riots
हिन्दू-मुस्लिम पुलिसकर्मी की तैनाती पर बंट गए SC जज, दो महीने में ही क्यों अदालती उलटफेर?

हिन्दू-मुस्लिम पुलिसकर्मी की तैनाती पर बंट गए SC जज, दो महीने में ही क्यों अदालती उलटफेर?

संक्षेप:

दो माह पुराने फैसले में दोनों जजों ने आदेश दिया था कि मामले की जांच SIT को करनी चाहिए और जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के अधिकारी शामिल होने चाहिए।

Nov 07, 2025 10:52 pm ISTPramod Praveen भाषा, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा दायर उस याचिका पर शुक्रवार को खंडित फैसला सुनाया, जिसमें 2023 में अकोला में हुए सांप्रदायिक दंगों की जांच के लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के पुलिस अधिकारियों का विशेष जांच दल गठित करने के न्यायालय के पूर्व निर्देश पर पुनर्विचार किए जाने का अनुरोध किया गया था। जस्टिस संजय कुमार ने 11 सितंबर को दिया गया पूर्व फैसला लिखा था और उन्होंने इस निर्देश पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया, वहीं जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने खुली अदालत में याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। दोनों न्यायाधीशों ने अपने ‘चैंबर’ में पुनर्विचार याचिका पर विचार किया।

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महाराष्ट्र सरकार ने तर्क दिया था कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों वाली एसआईटी गठित करने के निर्देश से संस्थागत धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा और लोक सेवकों की ओर से सांप्रदायिक पूर्वाग्रह को बढ़ावा देगा। इस पर जस्टिस कुमार ने कहा कि 11 सितंबर के आदेश में दिए गए तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि संज्ञेय अपराध के घटित होने की सूचना दिए जाने के बावजूद, न तो संबंधित थाने के अधिकारियों और न ही पुलिस अधीक्षक ने आवश्यक कार्रवाई की, जिससे उनकी ओर से कर्तव्य में पूर्ण लापरवाही स्पष्ट रूप से प्रकट होती है।

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पुनर्विचार याचिका में कई आधार

उन्होंने 2024 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उसमें उल्लेख किया गया था कि भारत ने धर्मनिरपेक्षता की अपनी अलग व्याख्या विकसित की है, जिसमें देश न तो किसी धर्म का समर्थन करता है और न ही किसी धर्म के पालन और आचरण को दंडित करता है। दूसरी ओर,जस्टिस शर्मा ने कहा कि पुनर्विचार याचिका में कई आधार दिए गए हैं और इन पर निश्चित रूप से न्यायालय को विचार करना होगा।

अब CJI के समक्ष रखा जाएगा मामला

अब यह मामला उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा। यह मामला न्यायालय के 11 सितंबर के फैसले से उपजा है, जिसमें मई 2023 के अकोला दंगों के दौरान 17 वर्षीय लड़के पर हमले की प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने में विफल रहने के लिए महाराष्ट्र पुलिस को फटकार लगाई गई थी। न्यायालय ने दो महीने पहले 11 सितंबर को कहा था कि जब पुलिस अधिकारी वर्दी पहनते हैं, तो उन्हें अपनी व्यक्तिगत और धार्मिक प्रवृत्तियों और पूर्वाग्रहों को त्याग देना चाहिए।

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उस फैसले में दोनों जजों न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि मामले की जांच एसआईटी को करनी चाहिए और जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के अधिकारी शामिल होने चाहिए।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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