
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण रोकने के उपाय पूरी तरह फेल, सुप्रीम कोर्ट ने कह दी बड़ी बात
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वायु प्रदूषण का संकट हर साल होता है, और ऐसा लगता है कि एक लॉन्ग-टर्म प्लान बनाने और उसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने 12 अगस्त के आदेश में बदलाव भी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में बढ़े प्रदूषण पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि वायु प्रदूषण को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा अब तक उठाए गए कदम पूरी तरह से फेल रहे हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने टिप्पणी की कि प्रदूषण में किसी भी सार्थक कमी के लिए तदर्थ प्रतिक्रियाओं के बजाय व्यापक और दीर्घकालिक योजना की जरूरत होगी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दिल्ली सरकार के स्कूलों को बंद करने या स्कूलों के हाइब्रिड मॉडल के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, "ये शॉर्ट-टर्म उपाय सिर्फ बच्चों और बुजुर्गों को अस्थायी सुरक्षा देने के लिए हैं। ये पूरी तरह से अंतरिम पॉलिसी फैसले हैं। ज्यादा से ज्यादा, इन्हें छुट्टियों का विस्तार माना जा सकता है, क्योंकि सर्दियों में स्कूल वैसे भी 10 से 15 दिनों के लिए बंद रहने वाले हैं।"
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वायु प्रदूषण का संकट हर साल होता है, और ऐसा लगता है कि एक लॉन्ग-टर्म प्लान बनाने और उसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने 12 अगस्त के आदेश में बदलाव किया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के खिलाफ जबरदस्ती कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे गाड़ी मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने दिल्ली सरकार की रिक्वेस्ट पर यह आदेश पास किया। दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने राजधानी में हवा की क्वालिटी के संकट को देखते हुए पुरानी कारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सरकार ने 12 अगस्त, 2025 को पास किए गए आदेश में बदलाव की मांग की ताकि BS-III तक की गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। भाटी ने कहा, "पुरानी गाड़ियों के एमिशन स्टैंडर्ड बहुत खराब हैं, और वे प्रदूषण बढ़ा रही हैं।" हवा प्रदूषण मामले में एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने भी कहा, "BS-IV 2010 में आया था, और BS-III मॉडल उससे पहले के हैं।"

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Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।
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