दो हफ्ते में दें जवाब... CJI की पीठ ने केंद्र सरकार समेत तीन को क्यों थमाया ऐसा नोटिस, बच्चों से जुड़ा है मामला
Three Language Rules: अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि इसमें संघवाद और पसंद के संवैधानिक मुद्दे शामिल हैं। सिब्बल ने कहा कि भाषा व्यक्तिगत पसंद का विषय है, इसे थोपा नहीं जा सकता।

Three Language Rules: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने पर अपनी सहमति दे दी है, जिसमें मौजूदा शैक्षणिक सत्र (2026-27) में एक जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भारत की कम से कम दो मूल भाषाओं सहित तीन भाषाओं की पढ़ाई करना अनिवार्य कर दिया गया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है।
शीर्ष अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (AAG) ऐश्वर्या भाटी से सीबीएसई द्वारा निर्णय को लागू करने के लिए की गई व्यवस्थागत तैयारियों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा और मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में तय की। याचिकाकर्ता यशिका भंडारी जैन और अन्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि सीबीएसई द्वारा एक राष्ट्रव्यापी परिपत्र जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि छात्रों को अगले शैक्षणिक वर्ष से तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा।
भाषा व्यक्तिगत पसंद का विषय, इसे थोपा नहीं जा सकता
अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि इसमें संघवाद और पसंद के संवैधानिक मुद्दे शामिल हैं। सिब्बल ने कहा कि भाषा व्यक्तिगत पसंद का विषय है, इसे थोपा नहीं जा सकता। फिलहाल, उच्चतम न्यायालय ने कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह इस मामले की सुनवाई जुलाई में करेगा।
एक जुलाई से तीन भाषा पढ़ना अनिवार्य
बता दें कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा जारी एक हालिया परिपत्र के अनुसार, एक जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भारत की कम से कम दो मूल भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम सीबीएसई द्वारा अपनी अध्ययन योजनाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
क्या पढ़ाया जाएगा?
बोर्ड ने कहा, "माध्यमिक स्तर पर अपेक्षित दक्षताओं को पर्याप्त रूप से पूरा करने के लिए, इन पाठ्यपुस्तकों के साथ स्कूलों द्वारा चयनित एक उपयुक्त स्थानीय या राज्य स्तरीय साहित्यिक सामग्री, जैसे लघु कथाएं, कविताएं या गैर-काल्पनिक रचनाएं, भी शामिल की जाएंगी।" इसमें यह भी कहा गया है कि पूरक साहित्यिक सामग्री के चयन और शैक्षणिक उपयोग के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश 15 जून तक जारी कर दिए जाएंगे।
कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की
बोर्ड द्वारा 15 मई को जारी परिपत्र के अनुसार, विदेशी भाषा का चयन करने वाले छात्र दो भारतीय मूल भाषाओं का अध्ययन करने के बाद केवल तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही ऐसा कर सकते हैं। परिपत्र में कहा गया है, "1 जुलाई, 2026 से कक्षा नौ के लिए तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए।"
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


