
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बांग्लादेश से वापस लाई गईं सुनाली खातून, जेल में काटे तीन महीने
सुनाली खातून के भारतीय नागरिक होने के बावजूद गलती से बांग्लादेश भेज दिा गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें वापस भारत लाया गया है। उन्हें 103 दिन बांग्लादेश की जेल में काटने पड़े।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम निवासी 26 वर्षीय सुनाली खातून को भारत का नागरिक होने के बावजूद बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुक्रवार को सुनाली को उनके 8 साल के बच्चे के साथ वापस लाया गया है। बांग्लादेश की जेल में 103 दिन बिताने के बाद को दोनों को उत्तर बंगाल में मालदा सीमा के रास्ते भारत लाया गया। हालांकि, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि चार अन्य निर्वासित लोगों को कब वापस लाया जाएगा। ये लोग अब भी बांग्लादेश में रह रहे हैं और इन्हें लाने का आदेश भी शीर्ष अदालत ने दिया है।
एक अधिकारी ने बताया कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में पहुंच चुकी सुनाली को शाम करीब सात बजे उप-उच्चायुक्त स्तर के एक अधिकारी को सौंप दिया गया, जहां से दोनों को पहले औपचारिकताओं के लिए मेहदीपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) शिविर ले जाया गया और बाद में मेडिकल जांच के लिए मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लाया गया। उन्होंने बताया कि अगर चिकित्सक उसे यात्रा के लिए फिट घोषित करते हैं, तो उसे शनिवार को बीरभूम जिले के मुरारई में पैकर गांव के दोरजी पारा इलाके में उसके घर पहुंचा दिया जाएगा।
सुनाली को दिल्ली के काटजू नगर थाना पुलिस ने 18 जून को रोहिणी के सेक्टर 26 स्थित बंगाली बस्ती से बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिया था। सुनाली, उसके पति दानिश और बेटे को बाद में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय के आदेश पर बांग्लादेश भेज दिया गया था। उस दौरान बीरभूम गांव के एक अन्य परिवार को भी निर्वासित किया गया था, जिसमें स्वीटी बीबी और उसके दो बेटे, कुर्बान शेख (16) और इमाम दीवान (6) शामिल थे।
सभी छह लोगों को 20 अगस्त से बांग्लादेश के चपई नवाबगंज सुधार गृह में कथित ‘घुसपैठियों’ के रूप में हिरासत में रखा गया था। हालांकि, एक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक दिसंबर को प्रत्येक को 5,000 टका के मुचलके पर जमानत दे दी थी।





