सुखेंदु शेखर का स्वागत, लेकिन सुष्मिता देव पर संशय; TMC के बागियों का BJP में नहीं होगा विलय
TMC Crisis and BJP: राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की थी। हालांकि, भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा सीट देने के पक्ष में नहीं दिख रही है।

TMC Crisis Updates: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) बेहद सतर्कता और रणनीतिक रूप से कदम आगे बढ़ा रही है। टीएमसी के कई सांसदों द्वारा केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने की खुली इच्छा जताए जाने के बावजूद भाजपा जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के मूड में नहीं है। पार्टी का पूरा ध्यान फिलहाल पश्चिम बंगाल में अपनी नई सरकार को स्थिरता देने और उसे स्थापित करने पर केंद्रित है।
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक मंथन के दौर से गुजर रही है और उसके कई असंतुष्ट नेता लगातार भाजपा पदाधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भाजपा टीएमसी के सभी बागी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने या उन्हें जगह देने के लिए तैयार है।
बागी सांसदों का भाजपा में विलय नहीं
कुछ दिनों पहले टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया था कि पार्टी छोड़ने वाले सांसद एनडीए सरकार का समर्थन करेंगे। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि वह लोकसभा में बागी सांसदों के इस गुट का अपने दल में विलय नहीं करेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, सबसे संभावित स्थिति यह हो सकती है कि बागी सांसद लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा करें और अपने नए पदाधिकारियों का चुनाव करें।
भाजपा का मानना है कि इस कदम के बाद एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई छिड़ सकती है, ठीक वैसी ही जैसी हाल के वर्षों में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामलों में देखने को मिली थी। इस स्थिति में तृणमूल छोड़ने वाले नेताओं को अपनी कानूनी और राजनीतिक रणनीति खुद तय करनी होगी।
सुखेंदु शेखर का स्वागत, सुष्मिता देव पर संशय
टीएमसी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसदों को लेकर भाजपा का रुख बेहद नपा-तुला है। सुखेंदु शेखर रॉय को भाजपा पार्टी में शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है। जब भी वे औपचारिक रूप से शामिल होना चाहेंगे, उनका स्वागत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, भविष्य में होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के दौरान उन्हें भाजपा के टिकट पर राज्यसभा भेजने पर विचार किया जा सकता है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस और राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की थी। हालांकि, भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा सीट देने के पक्ष में नहीं दिख रही है। बताया जा रहा है कि वे असम में ही काम करने की इच्छुक हैं, इसलिए उनके राजनीतिक भविष्य और भूमिका पर अंतिम फैसला असम भाजपा का राज्य नेतृत्व ही करेगा।
प्रकाश चिक बड़ाईक का क्या होगा?
टीएमसी से इस्तीफा देने वाले तीसरे राज्यसभा सांसद प्रकाश बड़ाईक को लेकर भाजपा ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्हें पार्टी में शामिल करने या किसी पद पर समायोजित करने की योजनाओं को लेकर भाजपा की ओर से अभी तक कोई संकेत नहीं दिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा बंगाल में टीएमसी के इस बिखराव का पूरा फायदा उठाना चाहती है, लेकिन वह किसी भी ऐसे कदम से बच रही है जिससे उसकी अपनी अंदरूनी राजनीति प्रभावित हो। यही वजह है कि पार्टी हर बागी नेता की उपयोगिता और उनकी छवि को तौलने के बाद ही अगला कदम उठा रही है।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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