'यह बंगाल का टैलेंट है...', जिसने उड़ा दी CBSE की नींद, उस हैकर की तारीफ में कसीदे पढ़ गए केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने CBSE वेबसाइट हैक कर खामियां उजागर करने वाले बंगाल के युवा एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी की तारीफ की है, जिसे अब IIT कानपुर में नौकरी मिली है।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने बंगाल के रहने वाले युवा एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी की जमकर तारीफ की है। निसर्ग वही छात्र हैं, जिसने हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की वेबसाइट को हैक कर उसके ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम में सुरक्षा खामियों को उजागर किया था। शुक्रवार को कोलकाता में इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित 'एजुकेशन फॉर विकसित भारत' कॉन्क्लेव में मजूमदार ने निसर्ग की इस उपलब्धि और बंगाल के टैलेंट का जिक्र किया।
'वह विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा बन सकता था, लेकिन हमने उसे मौका दिया'
केंद्रीय मंत्री मजूमदार ने कार्यक्रम में कहा, "एक 10वीं पास छात्र ने CBSE की वेबसाइट हैक कर ली। हमने उसकी विशेषज्ञता और टैलेंट को सही दिशा दी और उसे IIT-कानपुर से जोड़ा। वह चाहता तो किसी विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा बन सकता था, लेकिन हमने उसे सीखने और देश के विकास में योगदान देने का एक बेहतर मंच देने का फैसला किया।" मंत्री ने आगे कहा, "उसके माता-पिता भी हैरान थे। उन्होंने हमसे कहा कि वे उसे कंट्रोल नहीं कर सकते। वह उत्तर बंगाल के एक बहुत ही छोटे से शहर से आता है। यही वह टैलेंट है, जो हमारे बंगाल में मौजूद है।"
कैसे चर्चा में आए थे निसर्ग अधिकारी?
CBSE ने जब 12वीं के नतीजे घोषित किए थे, तो नए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल हुआ था। इस सिस्टम के जरिए आंसर शीट्स का डिजिटल इवैल्यूएशन किया जाना था। रिजल्ट आने के कुछ ही दिनों बाद 12वीं पास कर चुके निसर्ग अधिकारी ने इस सिस्टम की खामियों को दुनिया के सामने ला दिया था।
दरअसल, देश भर से सैकड़ों छात्रों ने आंसर शीट धुंधली होने, पन्ने गायब होने और फिजिकल व डिजिटल कॉपी में अंतर होने की शिकायतें की थीं। इसके बाद निसर्ग ने CBSE पोर्टल के पब्लिकली एक्सेसिबल कोड की जांच की और उसमें कई 'सिक्योरिटी कमजोरियों' का पता लगाया। उनके इसी टैलेंट को देखते हुए पिछले महीने IIT-कानपुर के साइबर सिक्योरिटी सेंटर 'C3iHub' ने उन्हें OSINT और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के तौर पर हायर कर लिया है।
बंगाल की शिक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस कॉन्क्लेव में बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। दोनों मंत्रियों ने बंगाल में शिक्षा की गिरती स्थिति और अपनी खोई हुई विरासत पर चिंता जताई।
सुकांत मजूमदार ने आंकड़े देते हुए कहा कि एक समय में बंगाल भारत की अर्थव्यवस्था का 'ड्राइविंग फोर्स' था और देश की जीडीपी में इसका 10.5 प्रतिशत योगदान था। 1961 तक राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी राष्ट्रीय औसत से अधिक थी। मजूमदार ने कहा कि राष्ट्रीय आदर्शों को पीछे छोड़ने का ही नतीजा है कि यहां से लक्ष्मी (धन की देवी) भी चली गईं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक भर्ती घोटाले ने शिक्षा व्यवस्था से युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है और अब सबसे बड़ी चुनौती उस भरोसे को वापस बहाल करने की है।
'कलकत्ता यूनिवर्सिटी अब महज एक क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी बनकर रह गई'
वहीं, वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "बंगाल में सार्वजनिक शिक्षा अब एक तबाह (devastated) हो चुका क्षेत्र है। यह सिर्फ सुधार का नहीं, बल्कि बुनियादी पुनर्निर्माण का मुद्दा है।" दासगुप्ता ने दुख जताते हुए कहा कि कलकत्ता यूनिवर्सिटी, जो कभी एशिया के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में से एक थी, अब महज एक क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी बनकर रह गई है।
कोलकाता अब 'ओल्ड-एज होम' बन गया है: दासगुप्ता
वित्त मंत्री ने राज्य में कुशल शिक्षकों की भारी कमी और युवाओं के पलायन पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "कोलकाता जैसे महानगर में अब युवाओं को ढूंढना एक दुर्लभ बात हो गई है। यह कोई साधारण टिप्पणी नहीं, बल्कि एक दर्द है। यह महानगर अब एक 'ओल्ड-एज होम' (वृद्धाश्रम) में तब्दील हो गया है, जो बताता है कि कहीं कुछ बहुत गलत हुआ है।"
दासगुप्ता ने यह भी साफ किया कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की भूमिका केवल एक 'इनेबलर' (माहौल बनाने वाले) की है, जबकि असल काम प्राइवेट सेक्टर को ही करना होगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ राज्य के विश्वविद्यालयों, प्राइवेट यूनिवर्सिटी या विदेशी यूनिवर्सिटी को लाना ही इकलौता समाधान नहीं है, बल्कि तीनों को एक साथ लेकर चलना होगा। इसके अलावा उन्होंने उन बिजनेस घरानों को भी वापस लाने पर जोर दिया, जो कलकत्ता छोड़कर जा चुके हैं।
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