Hindi NewsIndia NewsSudha Murthy refuses to participate in caste survey in karnataka infosys founder Narayan Murthy
सुधा मूर्ति का जाति सर्वे में शामिल होने से इनकार, पिछड़ा वर्ग वाली यह वजह बताई
संक्षेप: बीते हफ्ते अधिकारी मूर्ति के जयनगर स्थित आवास पर पहुंचे थे। इसपर मूर्ति कपल ने कहा कि वह इसमें शामिल नहीं होना चाहते हैं, क्योंकि वह पिछड़ा वर्ग से नहीं आते हैं और ऐसे में उनके मामले में यह सर्वे सरकार के किसी भी काम में आने वाला नहीं है। फिलहाल, उन्होंने इसपर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।
Thu, 16 Oct 2025 10:34 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति और उनके पति इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति ने कर्नाटक में जारी जातिगत सर्वेक्षण में शामिल होने से इनकार कर दिया है। खबर है कि इस संबंध में उन्होंने एक घोषणापत्र भी अधिकारियों को सौंप दिया है। फिलहाल, इस पत्र को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। सितंबर में कांग्रेस शासित कर्नाटक में जाति जनगणना की शुरुआत हो गई थी। यह प्रक्रिया 7 अक्तूबर तक चलना थी, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते हफ्ते जाति सर्वेक्षण से काम के सिलसिले में अधिकारी मूर्ति के जयनगर स्थित आवास पर पहुंचे थे। इसपर मूर्ति कपल ने कहा कि वह इसमें शामिल नहीं होना चाहते हैं, क्योंकि वह पिछड़ा वर्ग से नहीं आते हैं और ऐसे में उनके मामले में यह सर्वे सरकार के किसी भी काम में आने वाला नहीं है। फिलहाल, दोनों ने आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, घोषणापत्र में उन्होंने लिखा, 'हम किसी पिछड़ा वर्ग से नहीं आते हैं। ऐसे में इस सर्वे में हमारा शामिल होना सरकार के लिए किसी भी काम का नहीं होगा। ऐसे में हम प्रतिभागित करने से इनकार करते हैं।'
खबर है कि जाति सर्वेक्षण के तहत बेंगलुरु में 15 लाख से ज्यादा घरों से जानकारी ली जा चुकी है। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि इस सर्वे में कितने घरों ने शामिल होने से इनकार किया है। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि शामिल होने वाले लोगों ने कुल सवालों में से महज 25 फीसदी के जवाब दिए हैं। इस सर्वे में 60 मुख्य प्रश्न और 20 उप प्रश्न शामिल हैं।
अवधि बढ़ाई
बीते सप्ताह कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्य के शासकीय और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में 8 से 18 अक्टूबर तक छुट्टी की घोषणा की ताकि सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण में जुटे शिक्षक इस कार्य को पूरा कर सकें जिसे ‘जाति सर्वेक्षण’ कहा जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि 22 सितंबर को शुरू हुआ यह सर्वेक्षण मंगलवार को पूरा होना था हालांकि कई जिलों में इस काम में देरी के कारण मुख्यमंत्री व उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने इसे 10 दिनों के लिए और बढ़ाने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों को बताया, 'कार्य सात अक्टूबर को समाप्त होना था। कुछ जिलों में सर्वेक्षण लगभग पूरा हो चुका है लेकिन कुछ जिलों में इसमें देरी हो रही है।'
उन्होंने बताया, 'उदाहरण के लिए कोप्पल जिले में 97 प्रतिशत सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। उडुपी व दक्षिण कन्नड़ जिलों में क्रमशः 63 और 60 प्रतिशत सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। पूरे राज्य में सर्वेक्षण हमारी अपेक्षा के अनुरूप पूरा नहीं हुआ है।' सिद्धरमैया ने कहा कि बेंगलुरु में अब तक केवल 34 प्रतिशत सर्वेक्षण ही पूरा हुआ है और 6,700 शिक्षक इस कार्य में जुटे हैं।