भाड़े के पैसों से गुजारा कर रहे सुभाष चंद्रा, बोले- आधा घर किराए पर दे दिया है

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुभाष चंद्रा ने NCLT में 3,900 करोड़ रुपये के दावे पर सफाई दी है। उन्होंने कहा अब उनके पास 6.5 करोड़ रुपये हैं और घर का हिस्सा किराए पर देकर खर्च चला रहे हैं।

कभी अरबों का साम्राज्य, अब घर का हिस्सा किराए पर: सुभाष चंद्रा बोले- इसी से चलता है मेरा खर्च
कभी अरबों का साम्राज्य, अब घर का हिस्सा किराए पर: सुभाष चंद्रा बोले- इसी से चलता है मेरा खर्च

कभी देश के बड़े कारोबारी घरानों में गिने जाने वाले सुभाष चंद्रा आज अपने वित्तीय संकट और एनसीएलटी की कार्यवाही को लेकर खुलकर सामने आए हैं। जी एंटरटेनमेंट के संस्थापक और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन रहे चंद्रा ने एक वीडियो संदेश में अपनी मौजूदा आर्थिक स्थिति से लेकर करीब 3900 करोड़ रुपये के दावे, ग्रुप के पुराने कर्ज और भविष्य की योजनाओं तक पर बात की है। उनकी कही एक बात ने खास तौर पर ध्यान खींचा-उन्होंने बताया कि अब उनके पास एक छोटा सा घर है, जिसका कुछ हिस्सा उन्होंने किराए पर दे रखा है और उसी किराए की आमदनी से अपना खर्च चला रहे हैं।

‘मेरे पास अब सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये बचे हैं’

सुभाष चंद्रा ने कहा कि मौजूदा स्थिति में उनके पास करीब 6.5 करोड़ रुपये ही बचे हैं और एनसीएलटी की योजना के तहत इस रकम का इस्तेमाल देनदारियों को पूरा करने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसा व्यक्ति नहीं मानते जिसने सब कुछ खो दिया है, बल्कि उनका मानना है कि वह दोबारा खड़े हो सकते हैं।

चंद्रा ने अपनी मौजूदा जिंदगी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पास एक छोटा आवासीय घर है, जिसका उन्होंने एक हिस्सा किराए पर दे दिया है। इसी किराए से वह अपने रोजमर्रा के खर्च चला रहे हैं। यानी जिस कारोबारी साम्राज्य की कभी हजारों करोड़ रुपये की वैल्यू बताई जाती थी, उसके संस्थापक अब अपने घर से मिलने वाली किराये की आमदनी को अपने खर्च का जरिया बता रहे हैं।

उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है। चंद्रा ने कहा, आज मैं आपसे ठीक, हंसके साधारण रूप से बात कर रहा हूं। एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर बात नहीं कर रहा जिसका सबकुछ चला गया हो। जो आखिरी साढ़े 6 करोड़ रुपया बचा है वो भी प्लान के हिसाब से पे करना पड़ेगा। एक मेरा छोटा आवासीय मकान है उसका आधा हिस्सा मैंने भाड़े पर दिया हुआ है। उसकी इनकम से मैं अपना खर्चा चला रहा हूं। मुझे कोई अफसोस नहीं है।" उन्होंने कहा, "मैं फिर कमाऊंगा। मैं एक पायनियर हूं। मुझे पता है कि अच्छी और नई चीजें कैसे करनी हैं। मैं आगे भी ऐसा करता रहूंगा।’

45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था या कुछ और कहानी?

सुभाष चंद्रा ने अपने ऊपर चल रही एनसीएलटी कार्यवाही के संदर्भ में करीब 3,900 करोड़ रुपये के दावे पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनके कारोबारी समूह ने करीब 45,000 करोड़ रुपये उधार लिए थे, लेकिन इसमें से करीब 43,000 करोड़ रुपये पहले ही चुकाए जा चुके हैं। उनके मुताबिक करीब 2,000 करोड़ रुपये की देनदारी अभी ऐसी कंपनियों से जुड़ी है, जिनकी संपत्तियों और देनदारियों में असंतुलन बना हुआ है।

चंद्रा का कहना है कि एनसीएलटी में उनके खिलाफ मामला मुख्य रूप से उन व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ा है, जो उन्होंने कुछ कर्जदाताओं को दी थीं। उनका दावा है कि कुछ कर्जदाताओं को उनका पूरा पैसा पहले ही मिल चुका था, फिर भी उन्होंने एनसीएलटी के सामने दावा दाखिल किया। उन्होंने कहा कि करीब 3,900 करोड़ रुपये के दावे में लगभग 2,000 करोड़ रुपये ऐसे कर्जदाताओं से जुड़े हैं, जिन्होंने उनकी व्यक्तिगत गारंटी को कभी लागू ही नहीं किया था।

620 करोड़ का दावा सेटल, 1,100 करोड़ का ऑफर अभी मौजूद

चंद्रा ने यह भी बताया कि अदालत द्वारा नियुक्त रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स ने कर्जदाताओं की ओर से दाखिल दावों को स्वीकार किया था। उनके मुताबिक करीब 620 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके ग्रुप की कर्ज लेने वाली कंपनियों की ओर से कर्जदाताओं को करीब 1,100 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है।

चंद्रा ने कहा कि उनकी कंपनियां अभी भी कर्जदाताओं का पैसा चुकाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अपने परिवार से मिली एक सीख का जिक्र करते हुए कहा कि जिसका पैसा देना है, उसे वापस किया जाना चाहिए।

‘हमने परिवार की संपत्तियां बेच दीं’

सुभाष चंद्रा ने 2019 में शुरू हुए अपने कारोबारी संकट को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उस समय अपनी गलतियों को स्वीकार किया था। उन्होंने 24 जनवरी 2019 को लिखे अपने खुले पत्र का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ग्रुप की उधार लेने वाली कंपनियों का पैसा चुकाया जाएगा। उनका दावा है कि इसके बाद परिवार ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी संपत्तियां तक बेच दीं।

चंद्रा ने कहा कि उन्होंने अपनी संपत्तियां बेचीं, कंपनी बेचने की कोशिश की और यहां तक कि अपना घर भी किराए पर दिया, लेकिन कर्जदाताओं का पैसा चुकाने की कोशिश जारी रखी। उन्होंने दावा किया कि 45,000 करोड़ रुपये के मूल कर्ज में से करीब 43,000 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ पैसा अभी भी राज्य सरकारों के पास अटका हुआ है और कुछ संपत्तियां बेचकर बाकी देनदारियों को पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

‘मेरी निजी संपत्ति कभी 45 हजार करोड़ रुपये थी ही नहीं’

चंद्रा ने उस धारणा को भी खारिज किया कि जब उनके ग्रुप ने कर्ज लिया था, तब उनकी निजी संपत्ति करीब 45,000 करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा कि ग्रुप की मार्केट कैपिटलाइजेशन या नेटवर्थ को उनकी व्यक्तिगत संपत्ति मान लिया गया। इसके लिए उन्होंने 2016 में राज्यसभा सदस्य बनने के समय दाखिल अपनी संपत्ति घोषणा का हवाला दिया।

चंद्रा के मुताबिक, उस समय उन्होंने अपनी निजी नेटवर्थ करीब 39 करोड़ रुपये और कुछ लाख रुपये बताई थी। उन्होंने सवाल किया कि अगर 2016 में उनकी निजी संपत्ति करीब 39.7 करोड़ रुपये थी, तो सिर्फ एक साल में वह 45,000 करोड़ रुपये कैसे हो सकती थी। उन्होंने 45,000 करोड़ रुपये की निजी संपत्ति के आंकड़े को ‘मिथक’ बताया।

अब फिर बिजनेस शुरू करने की तैयारी

आर्थिक संकट के बावजूद सुभाष चंद्रा ने साफ कर दिया है कि उनका कारोबार से संन्यास लेने का इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह दोबारा बिजनेस में लौटेंगे। उनके मुताबिक स्विट्जरलैंड में उनका एक दोस्त निवेश के कारोबार से जुड़ा है और वह अगले एक-दो सप्ताह में उससे मिलने की योजना बना रहे हैं। वहां वह भारत और दूसरे देशों में निवेश के संभावित अवसरों पर बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वह अपने परिवार से 2 से 4 करोड़ रुपये तक उधार लेकर कुछ स्टार्टअप और दूसरे कारोबारों में निवेश कर सकते हैं।

Amit Kumar

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