भारत के पास कितने दिन का तेल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लगा बड़ा जाम; 700 टैंकर फंसे

Mar 03, 2026 01:19 pm ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने कहा, 'स्ट्रेट (ऑफ होर्मुज) बंद कर दिया गया है। अगर कोई भी गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के हीरो और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देगी।' खास बात है कि दुनिया की तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है।

भारत के पास कितने दिन का तेल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लगा बड़ा जाम; 700 टैंकर फंसे

ईरान और अमेरिका युद्ध का बड़ा असर दुनिया की तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। खबर है कि मार्च में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तेल टैंकर की आवाजाही में 80 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट देखी गई है। साथ ही जलमार्ग पर सैकड़ों टैंकर्स का लंबा जाम लग गया है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब ईरान रिवॉल्युशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट बंद करने का ऐलान किया है। साथ ही गुजरने वाले टैंकर्स में आग लगाने की धमकी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स में विंडवॉर्ड एंड केप्लर कंपनी के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 1 मार्च को सिर्फ तीन टैंकर होर्मुज से गुजरे। इनमें 28 लाख बैरल थे। 2 मार्च को सिर्फ एक छोटा टैंकर और एक छोटा कार्गो जहाज यहां से गुजरा। खबर है कि करीब 706 गैर ईरानी टैंकर स्ट्रेट के दोनों तरफ फंसे हुए हैं। इनमें 334 क्रूड ले जा रहे हैं। 109 डर्टी प्रोडक्ट टैंकर हैं और 263 क्लीन प्रोडक्ट जहाज हैं।

पीटीआई भाषा के अनुसार, ऊर्जा विश्लेषण कंपनी रिस्टैड एनर्जी ने कहा कि प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल यानी वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरुमध्य से होकर गुजरता है। यह तेल मार्ग विश्व का सबसे अहम 'चोकपॉइंट' या संकरा रणनीतिक मार्ग माना जाता है। होर्मुज जलडमरुमध्य के उत्तर में ईरान स्थित है, जबकि इस रास्ते से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान का तेल एवं गैस निर्यात होता है।

बढ़ सकती हैं पेट्रोल की कीमत

कारोबारियों को आशंका है कि कि ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति धीमी पड़ सकती है या ठप हो सकती है। क्षेत्र में हमलों, खासकर फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे दो जहाजों पर हमले के कारण निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हमले लंबे समय तक जारी रहे तो कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी हो सकती है।

ईरान की धमकी

रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के हवाले से बताया, कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने कहा, 'स्ट्रेट (ऑफ होर्मुज) बंद कर दिया गया है। अगर कोई भी गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के हीरो और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देगी।' खास बात है कि दुनिया की तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है।

भारत के पास है कितना तेल

पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि वह उभरती हुई स्थिति पर नजर रखे हुए है और देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता तथा किफायती दरों को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की थी।

फरवरी की शुरुआत में उन्होंने बताया था कि वैश्विक उथल-पुथल की किसी स्थिति में मांग को पूरा करने के लिए भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 74 दिनों के लिए पर्याप्त है। तब पुरी उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश के लिए, जो तेज गति से विकास कर रहा है, व्यवहार्य और सुरक्षित तेल भंडार आवश्यक है, ताकि वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में वह कमजोर स्थिति में नहीं हो।

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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