कंधा, कमर और गर्दन का दर्द बढ़ा रहा जिम और मोबाइल
प्रयागराज में अधिक वजन उठाने से अंकित गुप्ता और डिजिटल लाइब्रेरी में लंबे समय बैठने से श्रेयांश कटरा को कमर और गर्दन में दर्द हुआ। बेली अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 युवाओं की फिजियोथेरेपी की जाती है। डॉ. नीरज पांडेय ने बताया कि 85 फीसदी मरीज हड्डी विभाग से होते हैं।
प्रयागराज। केस-एक अल्लापुर के रहने वाले 19 वर्षीय अंकित गुप्ता नियमित जिम करते थे। एक दिन ज्यादा वजन उठाने से कमर में दर्द होने लगा। उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होने लगी। कई जगह इलाज कराने से आराम नहीं हुआ तब फिजियोथेरेपी कराना शुरू किए जिससे आराम हुआ। केस-दो 21 वर्षीय श्रेयांश कटरा में स्थित एक डिजिटल लाइब्रेरी में 12 से 15 घंटे तक बैठकर तैयारी करते थे। तीन माह से उनके गर्दन और कमर में दर्द होने लगा। जांच के बाद डॉक्टर ने उन्हें नियमित फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी। अंकित और श्रेयांश की तरह बेली अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 ऐसे युवाओं की फिजियोथेरेपी की जाती है, जो जिम, कंम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे उनके कंधे, कमर व गर्दन में दर्द होता है।
85 फीसदी मरीज हड्डी विभाग से होते हैं रेफर
bेली अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग के प्रभारी डॉ. नीरज पांडेय ने बताया हर माह लगभग 800 मरीजों की फिजियोथेरेपी की जाती है। इमसें 85 फीसदी हड्डी विभाग और 15 फीसदी न्यूरो विभाग के मरीज होते हैं। मरीजों में 70 से 80 फीसदी 15 से 35 साल तक की उम्र होते हैं।
जोड़ों में जकड़न में फिजियोथेरेपी कारगर
bेली अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय राजपाल ने बताया कि फिजियोथेरेपी कराने के कई फायदे हैं लेकिन हमें पता होना चाहिए इसकी उपयोगिता कितनी है। कुछ परिस्थितियों में ऑपरेशन के बाद मांसपेशियों को सामान्य स्थिति में लाने के लिए इसकी सलाह दी जाती है। जोड़ों में जकड़न होने या जोड़ के जाम होने की स्थिति में फिजियोथेरेपी अधिक कारगर होती है।


