गति, कौशल व रणनीति के सामंजस्य से जीवन को महत्वपूर्ण बनाएं छात्र
कानपुर में स्वामी प्रबुद्धानंद ने बताया कि जीवन का महत्व गति, कौशल और रणनीति पर निर्भर करता है। उन्होंने माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद को सफलता के लिए आवश्यक बताया। कार्यक्रम में सीएसजेएमयू के कुलपति ने वेदांत का प्रचार-प्रसार करने की बात कही और सभी विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं आयोजित करने की आवश्यकता जताई।

कानपुर। गति, कौशल और रणनीति के सही सामंजस्य से छात्र अपने जीवन को महत्वपूर्ण बना सकते हैं। यह बात स्वामी प्रबुद्धानंद ने कही। कहा, जीवन का महत्व तीन एस पर निर्भर है। वहीं, कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने वेदांत के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया और कहा कि सभी विभागों के विद्यार्थियों के लिए वेदांत की कक्षाएं होनी चाहिए। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के सीनेट हाल में गीता शोधपीठ, दीनदयाल शोध केंद्र, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की ओर से स्वामी प्रबुद्धानंद का विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इसका विषय आधुनिक युग में युवा शक्ति-सफलता एवं प्रसन्नता का मार्ग रहा।
स्वामी प्रबुद्धानंद ने कहा कि गति के संबंध में बताया कि जीवन में गति की आवश्यकता है अर्थात आशीर्वाद की पूंजी वह सफलता व प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए माता-पिता गुरुजनों का आशीर्वाद जीवन में अत्यंत आवश्यक है। इसकी अदृश्य शक्ति जीवन में अनेक समस्याओं का निराकरण कर देती है। कौशल शरीर का आंतरिक तेज व बल अर्थात बलिष्ठो भव। अपने आप को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने से जीवन में उन्नत का मार्ग प्रशस्त होगा। रणनीति ऐसे आचार व विचार, जिनसे कार्य में सफलता प्राप्त हो अर्थात हमारा आचरण व व्यवहार ऐसा हो जो हमारे मार्ग में आने वाली समस्याओं को दूर कर लक्ष्य तक ले जाएं। कार्यक्रम में चिन्मय मिशन के उपाध्यक्ष विनय सानन ने स्वामी जी का परिचय कराया। संचालन डॉ. मनोज अवस्थी ने किया। इस मौके पर गीता शोधपीठ के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, प्रो. डीसी श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार, डॉ. उमेश पालीवाल, डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी, डॉ. मानस उपाध्याय, डॉ. प्रशांत आदि मौजूद रहे।
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