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Hindi News देशमंत्रोच्चार और अग्नि के सात फेरे लिया बिना वैध नहीं आपका विवाह, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ऐसी बात?

मंत्रोच्चार और अग्नि के सात फेरे लिया बिना वैध नहीं आपका विवाह, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ऐसी बात?

SC on Hindu Marriage Act: कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वैध हिन्दू विवाह नहीं होने की स्थिति में कोई भी विवाह पंजीकरण अधिकारी अधिनियम की धारा 8 के प्रावधानों के तहत ऐसे विवाहो का पंजीकरण नहीं कर सकते

मंत्रोच्चार और अग्नि के सात फेरे लिया बिना वैध नहीं आपका विवाह, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ऐसी बात?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 01 May 2024 09:08 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध विवाह के लिए केवल प्रमाण पत्र ही पर्याप्त नहीं है बल्कि शादी समारोह और रीति-रिवाजों का पालन भी अनिवार्य रूप से किए जाने चाहिए। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि अगर किसी की शादी में ऐसे आयोजन का अभाव है तो उस जोड़े को वैवाहिक दर्जा नहीं दिया जा सकता है। यानी हिन्दू विवाह तभी वैध माना जाएगा, जब समाज के सामने पूरे मंत्रोच्चार के बीच अग्नि के सामने सात पवित्र फेरे लेने जैसी प्रथा निभाई गई हो।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा, "हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत वैध विवाह के लिए, वैवाहिक समारोहों का आयोजन किया जाना चाहिए और किसी विवाद की स्थिति में उस समारोह के सबूतों को दिखाया जाना चाहिए। अधिनियम की धारा 7 के अनुसार तब तक कोई हिंदू विवाह मान्य नहीं होगा जब ​​तक कि पक्षों ने ऐसे समारोह में भाग नहीं लिया हो। ऐसे समारोहों के बिना किसी संस्था द्वारा केवल प्रमाण पत्र जारी करने से न तो वैवाहिक स्थिति की पुष्टि होगी और न ही हिंदू कानून के तहत विवाह स्थापित हो सकेगा।"

संविधान के अनुच्छेद 142 (किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण शक्तियाँ) के तहत एक स्थानांतरण याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने ये टिप्पणियाँ की हैं। कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह को वैध नहीं मानते हुए विवादित पक्षों के खिलाफ तलाक, भरण-पोषण और आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया । मामले में वादी और प्रतिवादी (जोड़े) ने हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक शादी नहीं की थी, बल्कि उस दंपत्ति ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 8 के तहत सिर्फ अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन ही कराया था।

उस जोड़े ने वैदिक जनकल्याण समिति नामक एक संगठन से अपने विवाह का प्रमाण पत्र हासिल किया था। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर, दंपत्ति ने उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम, 2017 के तहत "विवाह पंजीकरण का प्रमाण पत्र" भी हासिल कर लिया था। 

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वैध हिन्दू विवाह नहीं होने की स्थिति में कोई भी विवाह पंजीकरण अधिकारी हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 8 के प्रावधानों के तहत ऐसे विवाहों का पंजीकरण नहीं कर सकते। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 8 के तहत विवाह का पंजीकरण केवल इस बात की पुष्टि करने के लिए है कि पक्षकारों ने अधिनियम की धारा 7 के अनुसार वैध विवाह समारोह में भाग लिया है।

इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत आवश्यक वैध समारोहों के बिना भारतीय विवाहों के पंजीकरण की प्रवृत्ति पर सख्त आपत्ति जताई है। कोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में विवाह के महत्व पर भी गहनता से प्रकाश डाला है। अदालत ने कहा कि भारतीय समाज में विवाह एक संस्था के रूप में बहुत महत्व रखता है। इसलिए, दम्पतियों को सिर्फ कागजी पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।