अंत्योदय हमारी राजनीति का मूल मंत्र: योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा महानगर के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कहा कि भाजपा का प्रशिक्षण अभियान कार्यकर्ताओं के वैचारिक और सांस्कृतिक परिष्कार का माध्यम है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को पार्टी की नीतियों का आधार बताया। प्रशिक्षण शिविरों से कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा से सशक्त किया जाता है।
राजीव दत्त पाण्डेय। गोरखपुर।
भारतीय जनता पार्टी महानगर के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि भाजपा का प्रशिक्षण अभियान केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के वैचारिक और सांस्कृतिक परिष्कार का माध्यम है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को भाजपा की नीतियों और कार्यशैली का आधार बताया।
प्रशिक्षण शिविर का महत्व
शनिवार को भारतीय जनता पार्टी महानगर के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश कार्यकारिणी में नवनिर्वाचित प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह, रमेश सिंह और क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कहा कि भाजपा का यह प्रशिक्षण शिविर पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान का अभिन्न हिस्सा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में संस्कारों से अनुप्राणित होकर भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय संगठन महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं। उनके विचार और संगठन निर्माण की कार्यशैली आज भी भाजपा के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित विचारधारा
भारतीय राजनीति में यदि अंत्योदय की अवधारणा को किसी ने सशक्त वैचारिक आधार दिया, तो वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय थे। स्वतंत्र भारत में उन्होंने सरकारों का आह्वान किया था कि आर्थिक विकास और नीतियों का केंद्र समाज के सबसे संपन्न वर्ग नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़ा सबसे गरीब, वंचित और जरूरतमंद व्यक्ति होना चाहिए। भाजपा की विचारधारा और सरकारों की कार्यप्रणाली इसी अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित है। सरकार की सभी योजनाओं और विकास नीतियों का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना तथा उसे मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा, राष्ट्रहित और सेवा भाव के मूल्यों से और अधिक सशक्त किया जाता है, जिससे वे समाज के बीच प्रभावी भूमिका निभा सकें।
राजनीति के मूल्यों और आदर्शों पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति तभी सार्थक होती है, जब वह मूल्यों, आदर्शों और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का आज विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में स्थापित होना उसके कार्यकर्ताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता और भारतीय जनसंघ के समय से मिले संस्कारों का परिणाम है। वास्तविक राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मूल्यों और आदर्शों पर आधारित जनसेवा का संकल्प होती है। मूल्यविहीन राजनीति समाज और राष्ट्र के लिए घातक साबित होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर 1977 तक और 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन से लेकर आज तक संगठन ने जिस वैचारिक प्रतिबद्धता और जनविश्वास के साथ अपनी यात्रा तय की है, वह किसी भी राजनीतिक दल के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा यदि विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में प्रतिष्ठित है तो इसके पीछे भारतीय जनसंघ के दौर से विकसित वे जीवन-मूल्य और संगठनात्मक संस्कार हैं, जिन्हें प्रत्येक कार्यकर्ता ने आत्मसात किया है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के संकल्प के साथ हुई थी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन सिद्धांतों, राष्ट्रनिष्ठा और बलिदान का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में वर्ष 1951 में प्रारंभ हुई भारतीय जनसंघ की यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक सत्ता हासिल करना नहीं था, बल्कि राष्ट्रहित, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जनसेवा के मूल्यों को स्थापित करना था। स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में मंत्री रहने के बावजूद डॉ. मुखर्जी ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तुष्टिकरण की नीतियों का विरोध करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनका यह निर्णय इस बात का प्रमाण था कि राष्ट्रहित और वैचारिक प्रतिबद्धता सत्ता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना के बाद संगठन ने अपनी राजनीतिक यात्रा सत्ता की लालसा से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर जनजागरण के उद्देश्य से शुरू की। उन्होंने कहा कि उस समय जनसंघ ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े उन निर्णयों का विरोध किया, जिन्हें वह राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल मानता था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के भारत से पूर्ण एकीकरण के पक्ष में संघर्ष किया। एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे का उद्घोष करते हुए तत्कालीन परमिट व्यवस्था का विरोध किया। इस आंदोलन के दौरान डॉ. मुखर्जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया और उनका जीवन राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए समर्पण का अमिट प्रतीक बन गया।
जनसंघ का गौरवमयी इतिहास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक नींव भारतीय जनसंघ के उन महापुरुषों के त्याग और बलिदान पर टिकी है, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कम आयु में ही कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और बंगाल अकाल के दौरान जनसेवा में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि डॉ. मुख Jerseys का 'एक देश, एक विधान, एक निशान और एक प्रधान'का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार हुआ। राजनीतिक स्थिरता देश के विकास की आधारशिला है, जिसकी अवधारणा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने दी और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में इसे मजबूती मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1975 के आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने सबसे अधिक संघर्ष किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां दीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानते हुए अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय भी इसी लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
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