खतरे के निशान से 4.2 मीटर नीचे यमुना, तटवर्ती गांवों में बढ़ी सतर्कता
यमुना का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन ने तटवर्ती गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। जलस्तर 107.8 मीटर है, जो खतरे के निशान से 4.2 मीटर नीचे है। एसडीएम निखिल राजपूत ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर सामान पहुंचाने के लिए कहा और जलस्तर की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया।

यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ प्रशासन ने तटवर्ती गांवों में सतर्कता बढ़ा दी है। सोमवार को नदी का जलस्तर 107.8 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 112 मीटर से 4.2 मीटर नीचे है। एसडीएम निखिल राजपूत ने सिकरोड़ी और गौहानी कलां समेत आसपास के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर हालात देखे। ग्रामीणों से बातचीत कर पानी बढ़ने की स्थिति में जरूरी सामान और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा। एसडीएम ने गांवों में ग्रामीणों से संवाद कर यमुना के बढ़ते जलस्तर की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नदी के पानी पर लगातार नजर रखें। जलस्तर तेजी से बढ़ने की स्थिति में घर का जरूरी सामान पहले ही ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दें। पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया। पशुओं के लिए भूसा और चारा निचले स्थानों से हटाकर ऊंचे स्थान पर रखने की सलाह दी गई, जिससे बाढ़ की स्थिति बनने पर चारे की समस्या न हो.
सुरक्षित स्थान चिह्नित करने के निर्देश
एसडीएम ने क्षेत्रीय लेखपालों और कानूनगो को यमुना के जलस्तर की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। संभावित बाढ़ की स्थिति में ग्रामीणों को पहुंचाने के लिए सुरक्षित स्थान पहले से चिह्नित करने और बाढ़ चौकियों पर जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने को कहा। ऊंचे स्थानों पर बने विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से भी संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर इन विद्यालयों का इस्तेमाल ग्रामीणों को सुरक्षित ठहराने के लिए किया जा सकेगा.
अभी खतरे की स्थिति नहीं : एसडीएम
एसडीएम निखिल राजपूत ने बताया कि सोमवार को यमुना का जलस्तर 107.8 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि खतरे का निशान 112 मीटर है। फिलहाल खतरे की स्थिति नहीं है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तटवर्ती गांवों के लोगों और पशुओं को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।


