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हिंदी न्यूज़ देशचिंताजनक! दिल्ली-मुंबई सदी अंत तक 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म होंगे

चिंताजनक! दिल्ली-मुंबई सदी अंत तक 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म होंगे

जलवायु खतरों से निपटने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए तो 2050 तक कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन मौजूदा स्तर से दोगुना हो जाएगा। ऐसा होने पर सदी के अंत तक तापमान वृद्धि 4.4 डिग्री की होगी।

चिंताजनक! दिल्ली-मुंबई सदी अंत तक 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म होंगे
Himanshu Jhaहिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Sat, 14 May 2022 07:03 AM

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यदि जलवायु खतरों से निपटने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए तो 2050 तक कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन मौजूदा स्तर से दोगुना हो जाएगा। ऐसा होने पर सदी के अंत तक तापमान वृद्धि 4.4 डिग्री की होगी। इससे दिल्ली और मुंबई समेत अन्य शहरों के अधिकतम तापमान में पांच डिग्री तक की वृद्धि हो सकती है। दिल्ली का अधिकतम तापमान 48 डिग्री पार कर सकता है। ग्रीनपीस की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट ‘इंडिया-हीटवेब ट्रेंड इन चेंजिंग क्लाईमेट’ में आईपीसीसी की हालिया रिपोर्ट एआर-6 को आधार बनाते हुए यह दावा किया गया है।

भारतीय शहरों में गंभीर हो सकती है हीट वेव
दिल्ली समेत देश के कई अन्य शहरों में हाल में जिस प्रकार से लोगों ने हीट वेव का सामना किया है, वह आने वाले समय के लिए बड़े खतरे का संकेत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली समेत अन्य भारतीय शहरों जैसे लखनऊ, पटना, जयपुर एवं कोलकाता में भी इसी प्रकार का रुझान बने रहने की आशंका है। इससे लोगों को ज्यादा तीव्र हीट वेव का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली में अप्रैल में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ा
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में 1970-2020 के दौरान अब तक सिर्फ चार बार ऐसा हुआ जब अप्रैल में तापमान 43 से ऊपर पहुंचा है। इस साल 29 अप्रैल को यह रिकॉर्ड टूटा था। रिपोर्ट के अनुसार, 1950 में 40 सर्वाधिक गर्म दिन रिकॉर्ड किए गए थे लेकिन 2020 में ऐसे दिनों की संख्या बढ़कर 100 दर्ज की गई है।

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2050 तक नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा
बता दें कि आईपीसीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सभी देश 2050 तक नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करते हैं तो सदी के अंत तक तापमान वृद्धि 1.8 डिग्री रहेगी, लेकिन यदि यह लक्ष्य 2050 की बजाय 2100 में हासिल होता है तब तापमान वृद्धि 2.7 डिग्री की होगी। ऐसी स्थिति में भी हीटवेब का खतरा कम नहीं होगा। गौरतलब है कि पेरिस समझौते के अनुसार, सदी के अंत तक तापमान वृद्धि को डेढ़ डिग्री तक सीमित रखने पर जोर दिया गया है।

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