संस्कृति भाषा में अपार संभावनाएं हैं मौजूद: प्राचार्य
संस्कृति भाषा में अपार संभावनाएं हैं मौजूद: प्राचार्य क क क क क क क क कक क क ककक कक

भदोही, संवाददाता। शहर के रामरायपुर स्थित डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय में मंगलवार को विश्व संस्कृत दिवस पर कार्यक्रम किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने और इसके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं व्याख्यानों का आयोजन हुआ।प्राचार्य प्रो. माया द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की गई। भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। संस्कृत भाषा के वैश्विक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। संस्कृत न केवल दुनिया की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है, बल्कि आधुनिक युग में कंप्यूटर भाषा विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शोध के क्षेत्रों में भी इसके लिए अपार संभावनाएं और अवसर मौजूद हैं।
संस्कृत विभाग प्रभारी डॉ. अंकिता तिवारी ने विश्व संस्कृत दिवस की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। बताया कि यह दिवस प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो हमारी प्राचीन वेद-वेदांग परंपरा और ऋषियों के ज्ञान का स्मरण कराने का एक पावन अवसर है। कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं की रचनात्मकता और बौद्धिक मता को परखने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा, श्लोक एवं भारतीय संस्कृति से संबंधित विषयों पर अत्यंत आकर्षक एवं संदेशप्रद पोस्टर तैयार किए। जिसमे प्रथम स्थान आशू यादव, द्वितीय स्थान कोमल गौतम, तृतीय स्थान चंचल सरोज एवं नेहा कनौजिया रहीं। प्रतियोगिता के सफल संचालन और मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में पूनम द्विवेदी एवं डॉ. शिखा तिवारी रहीं। इस मौके पर डा. रवींद्र कुमार पांडेय, बृजेश कुमार, डॉ. रुस्तम अली, डॉ. सुजीत कुमार सिंह आदि रहे।


