चलते-चलते-- दुनिया का पहला गुब्बारा जो पर्यावरण में खुद घुल जाएगा
लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने 'बायोलून' नामक पहला ऐसा गुब्बारा बनाया है जो 9 महीने में प्राकृतिक रूप से गल जाएगा। यह पर्यावरण में कचरे को कम करेगा। इसमें हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है, और इसकी कीमत सामान्य गुब्बारे के समान होगी। इसे अगले दो साल में बाजार में लाया जाएगा।

लंदन, एजेंसी। वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला ऐसा गुब्बारा बनाया है जो इस्तेमाल के बाद करीब 9 महीने में पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से गल जाएगा। इससे कचरा कम होगा। इसे लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इसका नाम ‘बायोलून’ रखा गया है। आम गुब्बारों को ज्यादा खिंचने वाला बनाने के लिए कुछ रसायन मिलाए जाते हैं। ये रसायन उसे पूरी तरह गलने से रोकते है, जिससे पर्यावरण में कचरा बढ़ता है। बायोलून में हानिकारक रसायन प्रयोग नहीं किए गए बल्कि इसकी रबड़ ऐसे बनाई गई है जो नमी, हवा, धूप और सूक्ष्मजीवों के संपर्क में धीरे-धीरे टूट सके।
बायोलून की कीमत सामान्य गुब्बारे जितनी ही होगी और इसे फुलाना भी आसान होगा। उम्मीद है कि यह उत्पाद अगले दो साल में बाजार में आ जाएगा। इसके अलावा इस तकनीक से भविष्य में दस्ताने, मेडिकल उपकरण, कपड़े और अन्य उत्पाद बनाने में भी किया जा सकता है।


