स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन ने दी वैश्विक पहचान: स्वामी भवेशानंद
रांची, प्रमुख संवाददाता। रामकृष्ण मिशन आश्रम, मोरहाबादी में शुक्रवार को विश्व भ्रातृत्व दिवस पर विशेष समारोह का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की 133वीं वर्षगांठ पर किया गया यह कार्यक्रम मानवता की सेवा का संदेश देने के लिए आयोजित किया गया था।

रांची, प्रमुख संवाददाता। रामकृष्ण मिशन आश्रम, मोरहाबादी में शुक्रवार को विश्व भ्रातृत्व दिवस पर विशेष समारोह का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की 133वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में सर्वधर्म समभाव और मानवता की सेवा का संदेश दिया गया। समारोह का शुभारंभ संन्यासियों द्वारा वैदिक ऋचाओं के समवेत गायन से हुआ। इसके बाद स्वामी ईश्वरानंद ने भावपूर्ण भजन ऐ मालिक तेरे बंदे हम... प्रस्तुत किया, जिस पर दिलीप बनर्जी ने तबले की संगत की। छात्र शोभन शनिग्रही और प्रीति कुमारी ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण पर विचार व्यक्त किए, जबकि स्वप्न मिस्त्री एवं उनके समूह ने प्रेरक समूह गान पेश किया।
समारोह का आयोजन
आश्रम के सचिव स्वामी भवेशानंद ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रायः महान हस्तियों की जन्म-जयंती मनाई जाती है, लेकिन भाषण की वर्षगांठ केवल स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की ही मनाई जाती है। इस भाषण ने भारत में राष्ट्रीय आत्मविश्वास का संचार किया और इसके विश्वगुरु बनने का मार्ग प्रशस्त किया। सह-सचिव स्वामी अंतरानंद ने कहा कि सत्य एक है और सभी धर्मों का अंतिम गंतव्य भी एक ही है। भिक्खु डॉ. राहुल रत्न ने भगवान बुद्ध के करुणा, मैत्री और प्रेम के संदेश की चर्चा करते हुए अविद्या के अंत को विश्वबंधुत्व की मूल आधारभूमि बताया। प्रो. हरविंदर सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव और स्वामी विवेकानंद दोनों ने ही मानव सेवा, समानता और सत्य को जीवन का महान उद्देश्य माना। राजगीर से आए स्वामी रामतत्त्वानंद ने श्रीरामकृष्ण देव के जीवन पर प्रवचन दिया।
कार्यक्रम का संयोजन
कार्यक्रम का संयोजन स्वामी सुखमयानंद व सुप्रतिम पात्रा ने किया। संचालन समृद्धि एवं प्रणय प्रत्यूष और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संदीप कुमार पॉल ने किया। इस अवसर पर स्वामी देवतात्मानंद, स्वामी लोकपालानंद सहित अनेक संन्यासी, शिक्षक व छात्र उपस्थित थे。


