संवेदनशील होकर पोक्सो मामलों की करें जांच- पीडीजे
लोहरदगा में विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा पोक्सो अधिनियम और जूविनाइल जस्टिस एक्ट पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विधि के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और अधिकारियों ने अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए गवाहों और दस्तावेजों के महत्व को भी बताया गया।

लोहरदगा, संवाददाता। विधिक सेवा प्राधिकार लोहरदगा के तत्वावधान में शनिवार को सिविल कोर्ट में एक दिवसीय मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें मुख्य रूप से पोक्सो अधिनियम, जूविनाइल जस्टिस एक्ट, बाल कल्याण समिति के कार्यों एवं अन्य पहलुओं पर चर्चा किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ पीडीजे सह अध्यक्ष डालसा राजकमल मिश्रा, प्रधान न्यायधीश कुटुंब न्यायालय प्रेमलता त्रिपाठी, डीजे द्वितीय नीरजा आसरी, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हेमंत कुमार सिन्हा और थानों से पहुंचे आईओ ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला का उद्देश्य
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पीडीजे ने कहा कि वर्ष में दो बार पाक्सो एक्ट से संबंधित विषय पर अनुसंधान एवं विचारण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।अनुसंधान में आईओ की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। इसलिए अनुसंधान भी बहुत ही संवेदनशील होकर करना चाहिए। पाक्सो मामले पर होने वाली आवश्यक कार्रवाई पर विस्तृत जानकारी दी। कहा कि पाक्सो एक्ट में उम्र महत्वपूर्ण बिंदु है। वहीं चार्ट शीट देने के बाद भी आपका दायित्व कम नहीं हो जाता है। कहा कि पीड़ित को न्याय तब मिल पाएगा जब समय पर गवाह का बयान होगा। गवाहों और दस्तावेजों को प्रस्तुत करना आपका दायित्व है। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ने कहा कि आईओ की भूमिका किसी भी केस में महत्वपूर्ण होती है। अनुसंधान एक कला है और काफी संवेदनशीलता के साथ इसे करना आवश्यक है। मानवता के आधार पर मामले की सावधानीपूर्वक जांच करें ताकि किसी निर्दोष को सजा नहीं मिले इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
समाज पर प्रभाव
संघ के सचिव ने कहा कि इस तरह की घटना से समाज अव्यवस्थित हो जाता है। पाक्सो का मामला आने पर एफआईआर करना है और सही से इस पर अनुसंधान करना है। प्रयास हो कि निर्दोष की सजा नहीं मिले और पीड़ित को न्याय मिले। डीसीपीओ बीरेन्द्र ने कहा कि पॉक्सो एक संवेदनशील मामला है इसे लेकर स्थानीय प्रशासन से लेकर सर्वोच्च्य न्यायालय तक संवेदनशील है। इसमें छोटी सी भूल से किसी पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता है और किसी निर्दोष को सजा हो जाती है। पॉक्सो का मामला आने पर एफआईआर करना आवश्यक है। एफआईआर नहीं करने पर सजा का प्रावधान है। वहीं उन्होंने पॉक्सो नियम के अंतर्गत पीड़ित को मिले अधिकार के बारे में बताया। साथ ही बाल कल्याण समिति के कार्यों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। डालसा सचिव मनोरंजन कुमार ने कार्यशाला का संचालन किया। उन्होंने पॉक्सो से संबंधित धाराओं के बारे में बताया। साथ ही पॉक्सो मामले पर किए जाने वाले आवश्यक कार्रवाई पर विस्तृत जानकारी दी। सदर अस्पताल के चिकित्सक अक्षय सक्सेना ने चिकित्सीय जांच से संबंधित जानकारी दी। कार्यशाला में प्रश्नोत्तरी के माध्यम से जानकारी साझा की गई। मौके पर एपीपी सुमन कुमार, एलएडीसीएस चीफ नसीम अंसारी, एलएडीसीएस के अधिवक्तागण, विभिन्न थानों के अनुसंधानकर्ता, सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष, सदस्य, पैनल अधिवक्ता, पीएलवी एवं अन्य लोग उपस्थित थे।


