पूर्णिया में 56 हजार तिरंगों में दिखेगी जीविका दीदियों की मेहनत
पूर्णिया में स्वतंत्रता दिवस 2026 एवं वंदे मातरम के 150 वर्ष पर महिला जीविका दीदियों द्वारा 56 हजार तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। सिलाई करते हुए, ये महिलाएं न केवल रोजगार प्राप्त कर रही हैं, बल्कि गर्व के साथ राष्ट्रध्वज बनाने में भी जुटी हैं। यह अभियान महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण को जोड़ता है।

पूर्णिया में 56 हजार तिरंगों में दिखेगी जीविका दीदियों की मेहनत -- -तिरंगे के साथ घर- घर पहुंचेगी महिला आत्मनिर्भरता की कहानी पूर्णिया, वरीय संवाददाता। स्वतंत्रता दिवस 2026 एवं वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जिले में संचालित किए जा रहे तिरंगा यात्रा कार्यक्रम को सफल बनाने में जीविका दीदिया राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) तैयार करने में जुटी है। सिलाई मशीन की आवाज के बीच इन दिनों जीविका दीदियों के हाथों में तिरंगे का रंग चढ़ रहा है। कोई कपड़े की कटिंग कर रही है ,तो कोई सिलाई में जुटी है। कोई तिरंगे को अंतिम रूप दे रही है। स्वतंत्रता दिवस से पहले जिले में घर-घर तिरंगा पहुंचाने की तैयारी के बीच जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं ने राष्ट्रीय ध्वज बनाने की जिम्मेदारी संभाली है। पूर्णिया जीविका के संचार प्रबंधक विधाता ने बताया कि जिले के लिए कुल 56 हजार तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सभी प्रखंडों में चार-चार हजार तिरंगे उपलब्ध कराने की तैयारी है。
महिला सशक्तिकरण के साथ राष्ट्र निर्माण :
जीविका समूह की महिलाओं के लिए यह काम सिर्फ रोजगार से जुड़ा नहीं है। राष्ट्रीय पर्व के लिए अपने हाथों से राष्ट्रध्वज तैयार करना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय भी है। महिलाओं का कहना है कि उनके द्वारा तैयार किया गया तिरंगा अब किसी परिवार के घर पर फहरेगा तो यह उनके लिए खुशी और गौरव का क्षण होगा। जिला प्रशासन का मानना है कि जीविका को तिरंगा निर्माण से जोड़ने से अभियान को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलेगी ।
सिलाई केंद्र में तैयार हो रहा तिरंगा :
राष्ट्रभक्ति और महिला आत्मनिर्भरता 56 हजार तिरंगे तैयार करने की योजना सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज की उपलब्धता बढ़ाने की कवायद नहीं है। इसके जरिए स्थानीय स्तर पर महिलाओं के हुनर को काम से जोड़ा जा रहा है। जब यही तिरंगे प्रखंडों के माध्यम से घर-घर पहुंचेंगे तो जीविका दीदियों की मेहनत भी हर परिवार तक पहुंचेगी। यानी इस बार जिले में हर-घर तिरंगा अभियान के पीछे महिलाओं के हाथों की मेहनत और आत्मनिर्भरता की कहानी भी दिखाई देगी।


