नहाय-खाय के साथ हरितालिका व्रत की हुई शुरूआत
महेशपुर में सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए हरितालिका व्रत मनाया। उन्होंने पवित्र नदी में स्नान किया, पूजा-अर्चना की और सात्विक भोजन किया। इस पर्व का महत्व माता पार्वती की भगवान शिव के लिए की गई तपस्या से जुड़ा है।

महेशपुर, एक संवाददाता। सुहागन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन व अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाने वाला हरितालिका व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं ने सुबह पवित्र नदी तथा घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्वच्छ जल से स्नान किया। स्नान के बाद शुद्धता के साथ पूजा-अर्चना की। पूजा-अर्चना के पश्चात केवल एक बार सात्विक भोजन किया। सात्विक भोजन में विशेष कर अरवा चावल, चने की दाल व कद्दू की सब्जी बनाई गई। हरितालिका तीज पर्व को लेकर सुहागिन महिलाओं ने घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई की व सोमवार को मनाए जाने वाले हरितालिका पर्व को लेकर निर्जला उपवास के लिए पूजा की सभी तैयारियां पूरी की।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले हरितालिका तीज के बारे में पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वनों में बालू के शिवलिंग बनाकर कठोर निर्जला तपस्या की थी। यह व्रत कुमारी कन्याएं भी मनचाहा वर (भगवान शिव जैसा पति) पाने के लिए करती है।


