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हिंदी न्यूज़ देशजम्मू-कश्मीर में एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगा विपक्ष? राहुल के साथ फारूक अब्दुल्ला की यात्रा के मायने समझिए

जम्मू-कश्मीर में एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगा विपक्ष? राहुल के साथ फारूक अब्दुल्ला की यात्रा के मायने समझिए

अब्दुल्ला के इस ऐलान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के अलावा विभिन्न मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के कई और नेताओं का भी इस यात्रा में शामिल होना तय है।

जम्मू-कश्मीर में एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगा विपक्ष? राहुल के साथ फारूक अब्दुल्ला की यात्रा के मायने समझिए
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,श्रीनगरThu, 24 Nov 2022 05:40 PM
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नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के जम्मू-कश्मीर पहुंचने पर उसमें शामिल होंगे। अब्दुल्ला ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना समय की मांग है। हालांकि अब्दुल्ला के इस ऐलान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के अलावा विभिन्न मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के कई और नेताओं का भी इस यात्रा में शामिल होना तय है। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा, "फारूक अब्दुल्ला ने हमें आश्वासन दिया है कि वह लखनपुर में यात्रा में शामिल होंगे। यह इलाका जम्मू-कश्मीर का प्रवेश द्वार है। वे कुछ दूरी तक राहुल गांधी के साथ चलेंगे।" 

कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, "हम महबूबा मुफ्ती सहित दूसरे दलों के वरिष्ठ नेताओं से भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के लिए संपर्क करेंगे।" इससे पहले ऑल पार्टीज यूनाइटेड मोर्चा (APUM) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को नेकां प्रमुख से जम्मू में उनके आवास पर मुलाकात की।

बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का नेतृत्व कर रहे हैं। अब्दुल्ला ने नई दिल्ली से ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “जब वह लखनपुर पहुंचेंगे, जहां से जम्मू-कश्मीर शुरू होता है, तो मैं वहां जाऊंगा और राहुल गांधी के साथ चलूंगा। हम इस देश की एकता और अखंडता के लिए साथ चलेंगे।” उन्होंने कहा कि एकजुट रहना समय की मांग है। पूर्व मुख्यमंत्री फिलहाल संसदीय समिति की बैठक के लिए नयी दिल्ली में हैं।

कुछ सामाजिक संगठनों के साथ कांग्रेस, पीडीपी, सीपीआई, सीपीएम और इंटरनेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (आईडीपी) के नेताओं के APUM प्रतिनिधिमंडल ने "सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकतों" को हराने के लिए विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर चर्चा करने के लिए अब्दुल्ला से मुलाकात की। 

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि APUM ने भारत जोड़ो यात्रा का समर्थन करते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव भी पारित किया है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर शिवसेना के अध्यक्ष मनीष साहनी ने कहा कि उनकी पार्टी ने यात्रा पर अभी कोई फैसला नहीं किया है। पूर्व सांसद शेख अब्दुल रहमान APUM के संरक्षक हैं और आईडीपी के सुप्रीमो आईडी खजुरिया इसके अध्यक्ष हैं। APUM यानी ऑल पार्टीज यूनाइटेड मोर्चा जम्मू-कश्मीर के लगभग एक दर्जन मुख्यधारा के राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का एक समूह है, जो भाजपा का विरोध करते रहे हैं।

जब भी केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होते हैं, तो गैर-भाजपा वोटों में सेंधमारी रोकने के लिए APUM के घटक दल आपस में मिलते रहे हैं। इसकी कई बैठकों में भाग लेने वाली पार्टियों में शिवसेना भी शामिल है। कांग्रेस ने अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले पीपुल्स एलायंस फॉर गुप्कर डिक्लेरेशन (PAGD) से खुद को दूर कर लिया था, क्योंकि इसका प्रमुख एजेंडा जम्मू-कश्मीर के राज्य की बहाली और अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A के तहत विशेष दर्जा प्राप्त करने का था, जिसे भाजपा ने अगस्त 2019 में निरस्त कर दिया था।

हालांकि, कांग्रेस APUM में शामिल होने को सही ठहराती है। इसमें  मुख्य रूप से NC, PDP, CPI और CPM जैसे PAGD जैसे दल शामिल हैं। रविंदर शर्मा का कहना है कि APUM सभी मुख्यधारा के विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों के लिए जम्मू-कश्मीर के राज्य की बहाली, विधानसभा चुनाव जल्दी कराने और सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एक संयुक्त लड़ाई के व्यापक मुद्दों पर एक बैठक का मैदान रहा है।

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