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जम्मू-कश्मीर को फिर मिलेगा स्पेशल स्टेटस? अनुच्छेद 370 पर 11 दिसंबर को फैसला

अनुच्छेद-370 को निरस्त करने का बचाव करने वाले हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी. गिरी ने पैरवी की।

जम्मू-कश्मीर को फिर मिलेगा स्पेशल स्टेटस? अनुच्छेद 370 पर 11 दिसंबर को फैसला
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Fri, 08 Dec 2023 06:25 AM
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सुप्रीम कोर्ट तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 11 दिसंबर को अपना फैसला सुनाएगा। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई 11 दिसंबर, सोमवार की वाद सूची के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी। पीठ के अन्य सदस्य न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बी. आर. गवई और सूर्यकांत हैं।

शीर्ष अदालत ने 16 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद 5 सितंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने केंद्र और अनुच्छेद-370 को निरस्त करने का बचाव करने वाले हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी. गिरी और अन्य को सुना था। 

याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव धवन, जफर शाह, दुष्यंत दवे और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बहस की थी।

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों-जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था। 

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