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हर कोई है आला हजरत दरगाह का फैन, विकिपीडिया ने जारी की फॉलोवर्स की लिस्ट

हर कोई है आला हजरत दरगाह का फैन

दुनिया भर में आला हजरत दरगाह ने सूफिज्म को एक अलग पहचान दी है। सोशल मीडिया पर दरगाह के फैन (फालोअर्स) ज्यादा ही सक्रिय हैं। इन मुरीदों में मुसलमान ही नहीं बल्कि हिंदुओं ने भी दरगाह आला हजरत को सूफिज्म का मरकज माना है। विकिपीडिया ने दुनिया भर के सबसे बड़े फैन की लिस्ट जारी की है। ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां उर्फ अजहरी मियां का नाम भी लिस्ट में है। कराची, तंजानिया, अफ्रीका, मिस्र जैसे देशों से लोग दरगाह आला हजरत की वेबसाइट पर अपने कमेंट दे रहे हैं। 

आला हजरत दरगाह को सुन्नियों का मरकज माना जाता है। मजहबी मामलों में गैरशरई कदम उठाने वालों के खिलाफ बरेली से कई बार आवाज उठी है। मजहबी मामलों में सरकार का दखल हो या दूसरे मसलकों के बयान बरेली से इसके जवाब दिये जाते रहे हैं। इस बार विकिपीडिया ने दुनिया भर के सबसे बड़े फालोअर्स की लिस्ट जारी की है। कैलिफोर्निया के काकाकौआ हवाई के राजा का 20 जनवरी 1891 को निधन हुआ था। उनके अंतिम संस्कार में बेतादाद फॉल्वर्स आए थे। दो जून 1981 को बांग्लादेश के राष्ट्रपति जियाउर्रहमान के जनाजे में भी बेतादाद लोग शामिल हुए थे। विकिपीडिया की लिस्ट में चाइना, इजराइल, वेतनाम, फ्रांस, न्यूयॉर्क, लंदन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के कई महान लोगों के इंतकाल में उनके फालोअर्स की तादाद काफी रही थी। 

जारी की फॉलोवर्स की लिस्ट: सलमान हसन

दुनिया भर में अब तक जितने भी बड़ी हस्तियां रही और उनके जनाजे में जो मुरीद जुटे इसकी लिस्ट विकिपीडिया ने जारी की है। लिस्ट में ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां उर्फ अजहरी मियां के जनाजे में उमड़ी मुरीदों की भीड़ को मिलियंस में दिखाया है। बरेली सुन्नियों का मरकज है। यहां से मजहबी मामले दुनिया भर से पूछे जाते हैं। 

दुनियाभर में हुआ आला हजरत पर शोध

मरकज दारुल इफ्ता की बुनियाद रखने वाले इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी (आला हजरत) ने मरकज दारुल इफ्ता मदरसे की शुरुआत की थी। हजारों किताबें मजहबी मामलात में आला हजरत ने लिखी थीं। इन किताबों पर दुनिया भर में शोध हुआ। अफ्रीका डरबन में इमाम अहमद रजा के नाम से रिसर्च सेंटर खुला। खाड़ी देशों ने शोध का रिजल्ट आने के बाद आला हजरत की लिखी किताबों को अमल में लाए। 

हिंदू-मुस्लिम सभी दरगाह के मुरीद

दरगाह की वेबसाइट पर तंजानिया के सलमान खान, कराची से एक मुस्लिम फैमिली, दिल्ली से विकास, हैदराबाद से असद और अन्य शहर और देशों से गैर मुस्लिम लोगों ने भी दरगाह को सुन्नियों का मरकज बताया। सैकड़ों मुरीदों ने कहा कि मजहबी मामले में सही जानकारी दरगाह से मिलती है। सूफिज्म में आला हजरत दरगाह की अलग पहचान है। इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी आला हजरत और ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां का समर्थन किया है।

तालीम से मिलेगी कामयाबी: उलेमा

ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां उर्फ अजहरी मियां की छमाई फातिहा रविवार को दरगाह आला हजरत स्थित खानकाहे पर हुई। शहर काजी मुफ्ती मो. असजद रजा खां की सरपरस्ती में फातिहा रस्म अदा की गई। उलेमा ने मुस्लमानों को दुनियावी और दीनी तालीम बच्चों को देने की नसीहत दी है।ताजुश्शरीया के मजहबी मामलों पर रोशनी डाली।

सलमान हसन खां कादरी ने बताया कि दिन भर मजार पर चादर-गुलपोशी का दौर चला। अस्र नमाज के बाद कारी शरफुद्दीन ने प्रोग्राम का आगाज कुरआन पाक की तिलावत से किया। फातिहा में मौलाना शाहजाद व मौलाना जाहिद ने ताजुश्शरीया की सवाने हयात पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि ताजुश्शरीया बताई तालीमात पर अमल करें और उनके मिशन को आम करें। शाम को कुल की फातिहा हुई।

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  • Web Title:wikipedia released followers list of ala hazrat dargah