विडंबना: उपेक्षा और संपत्ति विवाद में घिरीं 600 विधवाएं
बागपत में पति की मृत्यु से विधवा महिलाओं की स्थिति दयनीय है। विकास के साथ-साथ उन्हें संपत्ति विवाद, सामाजिक उपेक्षा और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दशक में 600 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिसमें 70% मामले संपत्ति विवाद से संबंधित हैं।

बागपत। पति की मृत्यु केवल जीवनसाथी का जाना नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े हिस्से में महिला के वजूद पर ही सवालिया निशान खड़ा कर देता है। जनपद में एक तरफ जहां विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिले की हजारों विधवा महिलाएं आज भी घूंघट के पीछे अपनों के ही दिए दर्द, संपत्ति विवाद और सामाजिक उपेक्षा से जूझ रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि एक साल में ही विधवा महिलाओं के उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और पैतृक संपत्ति पर कब्जे को लेकर 600 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। -------
पिछले 10 वर्षों में उत्पीड़न का ऐसा रहा ट्रेंड
यहां महिला थाना, वन स्टॉप सेंटर और पारिवारिक परामर्श केंद्रों के पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों और शोध के अनुसार, विधवा महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों में एक विशेष पैटर्न देखा गया है। जिले में सामने आए मामलों में 70 प्रतिशत से अधिक मामले संपत्ति विवाद और बेदखली से जुड़े हैं। पति की मृत्यु के बाद ससुराल पक्ष द्वारा महिला को घर से निकालने, मायके भेजने या मृत पति के हिस्से की जमीन-जायदाद अपने नाम कराने के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। इसके अलावा 20 प्रतिशत मामलों में सामाजिक बहिष्कार (मांगलिक कार्यों से दूर रखना) और 10 प्रतिशत मामलों में घरेलू हिंसा व बच्चों से अलग करने की धमकी शामिल है।
10 साल का ग्राफ
पिछले एक दशक में जिले में विधवा महिलाओं द्वारा पुलिस और अदालतों में दर्ज कराए गए विभिन्न प्रकार के प्रताड़ना के मामलों की संख्या लगभग दो हजार से अधिक रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लोकलाज और बच्चों के भविष्य के डर से लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं शिकायत दर्ज ही नहीं कराती हैं।
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