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वंदे भारत से लेकर शताब्दी तक, घंटों की देरी से क्यों चल रहीं कई ट्रेनें; 60 से ज्यादा रद्द

शंभू रेलवे स्टेशन के पास पटरियों पर किसानों का एक समूह धरना दे रहा है। इस धरन को शुक्रवार को एक महीना पूरा हो गया। वहीं इस इलाके में चल रहे किसान आंदोलन को 22 मई को 100 दिन पूरे हो जाएंगे।

वंदे भारत से लेकर शताब्दी तक, घंटों की देरी से क्यों चल रहीं कई ट्रेनें; 60 से ज्यादा रद्द
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 18 May 2024 03:03 PM
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पंजाब में चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण जम्मू-कश्मीर में रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों की देरी से चल रही हैं। दरअसल शंभू और खनौरी सीमाओं पर अपने आंदोलन के सिलसिले में तीन किसानों को गिरफ्तार किया गया था। अब उनकी रिहाई की मांग को लेकर शंभू रेलवे स्टेशन के पास पटरियों पर किसानों का एक समूह धरना दे रहा है। इस धरन को शुक्रवार को एक महीना पूरा हो गया। वहीं इस इलाके में चल रहे किसान आंदोलन को 22 मई को 100 दिन पूरे हो जाएंगे। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) और एसकेएम (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले 17 अप्रैल को धरना शुरू किया गया था। बीकेयू (शहीद भगत सिंह, हरियाणा) के प्रवक्ता तेजवीर सिंह ने कहा, “एक महीना बीत गया लेकिन हरियाणा सरकार ने हमारी मांगों पर गौर करने की जहमत तक नहीं उठाई। वे किसानों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।” 

150 से अधिक ट्रेनों को अन्य मार्गों से डायवर्ट किया जा रहा 

हालांकि, अंबाला रेलवे मंडल कार्यालय के अनुसार, पंजाब और हरियाणा के बीच पड़ने वाले शंभू रेलवे स्टेशन पर धरने के कारण, प्रतिदिन लगभग 69 ट्रेनें रद्द की जा रही हैं और 150 से अधिक ट्रेनों को अन्य मार्गों से डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे ट्रेनें देरी से चल रही हैं। वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी रोजाना चार से आठ घंटे की देरी से चल रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, लुधियाना निवासी अमनप्रीत सिंह ने कहा कि यह सरकारी अधिकारियों और किसान यूनियनों दोनों के लिए आम जनता के बारे में सोचने का सही समय है। हर कोई अपनी डेस्टिनेशन तक पहुंचने के लिए कैब का खर्च नहीं उठा सकता। इसके अलावा रेल रोको के कारण सड़क पर ट्रैफिक भी बढ़ गया है।
 
केएमएम समन्वयक सरवन पंधेर ने कहा, “हरियाणा सरकार ने हमारे युवा किसानों पर मामला दर्ज किया और फिर उन्हें झूठे मामलों में गिरफ्तार कर लिया। जब हम आवाज उठा रहे हैं तो वे हमारी बात सुन ही नहीं रहे हैं। हम कभी भी रेल पटरियों पर नहीं बैठना चाहते थे, लेकिन अगर हमारी मांगें नहीं सुनी गईं तो हम क्या कर सकते हैं?”

इन ट्रेनों पर पड़ रहा बुरा असर

एक अधिकारी ने कहा कि पड़ोसी पंजाब में किसानों के आंदोलन के कारण विशेष रूप से जम्मू और कटरा के लिए ट्रेन सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा, "कई ट्रेनें या तो रद्द कर दी गई हैं या अपने निर्धारित समय से कुछ घंटे देरी से चल रही हैं।" उन्होंने बताया कि जम्मू मेल (पुरानी दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा) और शहीद कैप्टन तुषार महाजन उधमपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली के सराया रोहिल्ला के बीच चलने वाली विशेष ट्रेन 17, 18 और 19 मई को रद्द कर दी गई है।

एक अधिकारी ने कहा कि एक अन्य ट्रेन, श्री माता वैष्णो देवी कटरा-कालका एक्सप्रेस को भी 17-18 मई के लिए रद्द कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "जम्मू पहुंचने वाली कुछ ट्रेनों के मार्ग बदल दिए गए हैं, जिससे लगभग 04 से 05 घंटे की देरी हुई है।" एक अधिकारी ने कहा, ''प्रभावित रेल सेवा के कारण श्री माता वैष्णो देवी के तीर्थयात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।'' जम्मू रेलवे स्टेशन के निदेशक प्रतीक श्रीवास्तव ने कहा, ''दो ट्रेनें तीन दिनों के लिए रद्द कर दी गई हैं और आगे के कार्यक्रम पर निर्णय बाद में किसानों के विरोध के घटनाक्रम के आधार पर लिया जाएगा। ”

क्यों भड़के हैं किसान

मार्च के मध्य में अनीश खटकर नामक व्यक्ति को जींद में खटकर टोल प्लाजा पर धरना आयोजित करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जबकि नवदीप जलबेरा और गुरकीरत सिंह पर कथित तौर पर पुलिस पर हमला करने के लिए हत्या के प्रयास और अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया था। दोनों को 29 मार्च को अंबाला से गिरफ्तार किया गया था और जेल में डाल दिया गया था।

इन आरोपों को "निराधार" बताते हुए बीकेयू (शहीद भगत सिंह, हरियाणा) नेता गुरमनीत सिंह मंगत ने कहा, "उन्होंने हमारे लड़कों को बिना किसी कारण के सलाखों के पीछे डाल दिया है। हमने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है और चाहते हैं कि हमारे लड़कों को बिना शर्त रिहा किया जाए। पिछले एक महीने में हरियाणा सरकार ने किसानों से बातचीत की पहल करने की कोशिश तक नहीं की। वे हमें गलत तरीके से दिखाना चाहते हैं। हम ब्रिटिश काल में नहीं रहते। हम अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।” जानकारी के मुताबिक, इस मुद्दे पर कई बैठकों के बावजूद गिरफ्तार किसानों को रिहा नहीं किया गया है। लुधियाना में उद्योगपतियों और बरनाला में व्यापारियों ने रेलवे ट्रैक पर धरने के खिलाफ आवाज उठाई है क्योंकि इससे उन्हें "नुकसान" हो रहा है।