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ईसाई और पारसी तक CAA में शामिल, फिर मुस्लिमों को ही क्यों छोड़ा; क्या बोले अमित शाह

अमित शाह ने मुस्लिम शरणार्थियों को CAA में शामिल न करने पर कहा कि इस देश का इतिहास विभाजन का है। मुस्लिमों के लिए एक अलग हिस्सा ही बना था। फिर वहां अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न हो तो हम क्या करेंगे?

Surya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीThu, 14 March 2024 12:12 PM
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ईसाई और पारसी तक CAA में शामिल, फिर मुस्लिमों को ही क्यों छोड़ा; क्या बोले अमित शाह

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने विस्तार से जानकारी दी है। इसके अलावा कानून के प्रावधानों पर भी बात की। इस कानून के तहत हिंदू, जैन, बौद्ध और सिखों के अलावा ईसाई और पारसी शरणार्थियों को भी नागरिकता देने का प्रावधान है। फिर मुस्लिमों को ही क्यों छोड़ दिया गया? ANI के इंटरव्यू में इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने इसके पीछे विभाजन का पूरा इतिहास बताया। उन्होंने कहा, 'इस देश का एक इतिहास है। 15 अगस्त, 1947 को देश का विभाजन हो गया। हमारा भारत तीन हिस्सों में बंट गया। हमारी विचारधारा इसके खिलाफ थी। धर्म के आधार पर देश का विभाजन ही नहीं होना था।'

अमित शाह ने कहा, 'फिर देश बंट गया और वहां अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न हो, उनकी मां, बहन और बेटियों का उत्पीड़न हो तो हमारा क्या कर्तव्य है?  हमारा यह कर्तव्य है कि हम उन लोगों को शरण दें। अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद जब पाकिस्तान के हिस्से में दंगे हुए और हिंदू पीड़ित थे तो कांग्रेस के ही नेताओं का कहना था कि आप लोग जहां हैं, वहीं अभी रुक जाइए। हम आपके लिए व्यवस्था करेंगे। 70 सालों में वह वादा भूला दिया गया, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी इसे पूरा कर रहे हैं।'

अमित शाह का सवाल- पाक और बांग्लादेश से हिंदू-सिख कहां गए

यही नहीं इंटरव्यू में जब पूछा गया कि हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म का तो मूल भारत में ही है। इसलिए इनके पीड़ितों को भारत लाना समझ में आता है। लेकिन ईसाई और पारसी भी तो विदेशी मूल के धर्म हैं। फिर उन्हें क्यों लाया जा रहा है। इस पर अमित शाह ने कहा, 'मुस्लिम आबादी के लिए वह हिस्सा बना था। अखंड भारत का जो लोग हिस्सा थे और जिन पर धार्मिक प्रताड़ना हुई है। उन्हें शरण देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। जब विभाजन हुआ तो पाकिस्तान में 23 फीसदी हिंदू थे। आज 3 ही पर्सेंट बचे हैं। कहां गए ये लोग? इन लोगों को सताया गया तो बड़ी संख्या में लोगों ने धर्म परिवर्तन कर लिया। मैं बांग्लादेश की ही बात करूं तो 1951 में वहां हिंदुओं का प्रतिशत 22 पर्सेंट था और 2011 में यह आंकड़ा 10 फीसदी का ही रह गया। अफगानिस्तान में 1992 में 2 लाख सिख और हिंदू थे, आज 500 ही बचे हैं। क्या इन लोगों को अपनी आस्था से जीने का हक नहीं है। भारत जब एक था तो ये हमारे ही भाई बहन हैं।' 

शरणार्थियों की दूसरी पीढ़ी का क्या होगा? कैसे मिलेंगे अधिकार

अमित शाह ने कहा कि मुस्लिमों के लिए भी भारत में नागरिकता का अलग से प्रावधान हैं। यह ऐक्ट तो उन लोगों के लिए है, जो पीड़ित होकर आए हैं। अमित शाह ने यह भी कहा कि जिन लोगों के पास दस्तावेज नहीं हैं, उनके बारे में भी विचार किया जाएगा। अब तक जो जानकारी हमारे पास है, उसके अनुसार 85 फीसदी लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं। यही नहीं यदि शरणार्थियों की यह दूसरी पीढ़ी है तो उनका क्या होगा। इस पर अमित शाह ने कहा कि 15 अगस्त, 1947 से 31 दिसंबर, 2014 तक आए सभी लोगों का स्वागत है। हिंदू शरणार्थियों को अधिकार देने पर अरविंद केजरीवाल के सवाल उठाने को लेकर भी अमित शाह खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि इन लोगों को यदि देश की इतनी ही चिंता है तो फिर रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर क्यों चुप हैं। ये लोग वोट बैंक की राजनीति करते हैं। इन्हें दिल्ली के चुनाव की परवाह है।