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तेलंगाना में कांग्रेस के CM फेस से क्यों खुश है RSS का छात्र संगठन, दे रहा बधाई

तेलंगाना में कांग्रेस को शानदार जीत दिलाने वालों में से एक कांग्रेस के सीएम फेस रेवंत रेड्डी के लिए आरएसएस का युवा संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) काफी खुश है और उन्हें बधाई दे रहा है।

तेलंगाना में कांग्रेस के CM फेस से क्यों खुश है RSS का छात्र संगठन, दे रहा बधाई
Himanshu Tiwariवृंदा तुलस्यान, हिन्दुस्तान टाइम्स,नई दिल्लीMon, 04 Dec 2023 07:02 PM
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तेलंगाना में कांग्रेस की जीत के बाद रेवंत रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने को लेकर चर्चाओं का दौर गर्म है। कांग्रेस के सीएम फेस रेवंत रेड्डी के लिए आरएसएस का छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) काफी खुश है और उन्हें बधाई दे रहा है। एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक, आशुतोष सिंह ने सोमवार को केसीआर सरकार के खिलाफ शानदार जीत के लिए एबीवीपी के पूर्व सदस्य और तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी के वर्तमान चेहरे रेवंत रेड्डी को बधाई दी। इस बात का यहां उल्लेख करना जरूरी है कि रेवंत ने अपनी सियासी करियर की शुरुआत एबीवीपी से ही की थी। 

एबीवीपी ने दी रेवंत को बधाई

एचटी से बात करते हुए आशुतोष सिंह ने तेलंगाना में कांग्रेस के चेहरे के रूप में रेवंत रेड्डी पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "लगभग 2-3 महीने पहले, 86,000 छात्रों ने उनके प्रति व्यवहार के कारण बीआरएस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। लेकिन जहां तक ​​रेवंत रेड्डी का सवाल है हम उन्हें बधाई  देते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "एबीवीपी ने छात्रों के लिए काम करना जारी रखा है। एक छात्र संगठन के रूप में हमारी भूमिका हर क्षेत्र में युवाओं को नेतृत्व देने की रही है।"

तेलंगाना में कांग्रेस को बढ़त दिलाने वालों में से एक रेवंत रेड्डी ने राज्य में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, कांग्रेस के साथ रेड्डी का जुड़ाव केवल छह साल का है। राजनीति में उनका प्रारंभिक प्रवेश एबीवीपी के सदस्य के रूप में हुआ था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की छात्र शाखा एबीवीपी ने कहा कि वे जल्द ही दक्षिण में पैठ बनाने के लिए काम करेंगे।

एबीवीपी का फेस होने पर औवैसी ने घेरा

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी उनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन एबीवीपी की पृष्ठभूमि को लेकर उन पर निशाना साधते रहे हैं। रेड्डी पहले कुछ समय के लिए बीआरएस (तब तेलंगाना राष्ट्र समिति) में रह चुके हैं। वह 2006 में जिला परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते थे। वह 2007 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अविभाजित आंध्र प्रदेश में विधान परिषद में निर्वाचित हुए। रेड्डी तेलुगूदेशम पार्टी (तेदेपा) में शामिल हो गए थे और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के करीबी थे। उन्होंने 2009 में तेदेपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था और 2014 में तेलंगाना के अलग राज्य बनने पर भी उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की थी। वह 2015 में विधान परिषद चुनाव में एक विधायक को तेदेपा के पक्ष में मतदान करने के लिए रिश्वत देने की कोशिश करते हुए कथित रूप से कैमरे में कैद हो गए थे। 

रेड्डी को हैदराबाद की एक जेल भेज दिया गया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई। वह 2018 के विधानसभा चुनाव में बीआरएस उम्मीदवार से हार गए थे। उन्होंने तेदेपा छोड़कर 2017-18 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में दिल्ली में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। रेड्डी 2019 के लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की मल्काजगिरि संसदीय सीट से कांग्रेस सांसद के रूप में निर्वाचित हुए। रेड्डी को 2021 में कांग्रेस में 'जूनियर' नेता होने के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे प्रदेश कांग्रेस इकाई में अनेक वरिष्ठ नेता असंतुष्ट दिखे। रेड्डी के सामने चुनौतीपूर्ण हालात के बीच कांग्रेस का भविष्य संवारने का कठिन कार्य था और वह पार्टी नेताओं को एकजुट करने में लग गए। 

कैसे बने कांग्रेस का फेस

तेलंगाना में 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के 12 विधायकों का 2019 में बीआरएस में शामिल हो जाना भी रेड्डी के लिए असहज करने वाला घटनाक्रम था। तेलंगाना में बंडी संजय कुमार को भाजपा की कमान मिलने के बाद 2020 और 2021 में दो विधानसभा उपचुनावों और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में भगवा दल को बड़ी सफलता मिली और कांग्रेस को एक बार फिर झटका लगा। हालांकि रेड्डी कड़ी चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस को सफलता दिलाने की मशक्कत करते रहे और इस साल मई में कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस को थोड़ी ऊर्जा मिली। इसके बाद तेलंगाना की जनता में कांग्रेस को लेकर धारणाएं बदलने के साथ पार्टी का ग्राफ बढ़ता दिखाई दिया। मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के. कविता पर दिल्ली आबकारी नीति मामले में लगे आरोपों ने भी कांग्रेस को बल प्रदान किया। फुटबॉल प्रेमी रेड्डी को राहुल गांधी और कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी शिवकुमार का करीबी माना जाता है। वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन के मद्देनजर मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

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