ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News देश जून के आखिरी में भी क्यों इंतजार करवा रहा मॉनसून? IMD ने दी यह बुरी खबर

जून के आखिरी में भी क्यों इंतजार करवा रहा मॉनसून? IMD ने दी यह बुरी खबर

मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलात है कि मॉनसून का पैटर्न शिफ्ट हो रहा है। अब जून में ज्यादा गर्मी पड़ती है और बारिश कम होती है। वहीं सितंबर के महीने में बारिश बढ़ती है।

 जून के आखिरी में भी क्यों इंतजार करवा रहा मॉनसून? IMD ने दी यह बुरी खबर
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 25 Jun 2024 06:58 AM
ऐप पर पढ़ें

भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए अब भी कई राज्यों में लोग मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं। वहीं जून के महीने में भी बारिश तरसा रही है। इससे खेती पर भी बुरा असर पड़ रहा है और तापमान भी सामान्य से ज्यादा बना हुआ है। मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो  लगातार जून में बारिश की कमी होती जा रही है। वहीं सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की जाती है। वहीं पूर्वी भारत में सूखे के दिनों में बढ़ोतरी हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून अब शिफ्ट हो रहा है। इस पूरे पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश कब और कहां होगी, यह अब पहले जैसा नहीं रहा। 

जुलाई में शुरू होती है मॉनसूनी बारिश
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में मौसम विभाग के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि 2008 के बाद से ही जून में बारिश में कमकी देखी गई है। 1971 से 2020 तक जून के महीने में सामान्य बारिश होती थी। इसका मतलब अब मॉनसूनी बारिश ठीक से जुलाई में ही शुरू होती है। खास तौर पर पूर्वी, मध्य और उत्तरपश्चिम भारत में मॉनसून का असर देर से दिखाई देता है। 

दूसरी तरफ 2008 के बाद से सितंबर के महीने में होने वाली बारिश में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। 2008 के बाद से 9 साल ऐसे रहें जब सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। वहीं जुलाई की बात करें तो सात साल ऐसे रहे हैं जिनमें सामान्य से कम बारिश हुई और आठ साल में ज्यादा। अगस्त में आठ साल सामान्य से कम और सात साल सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ ऐंड साइंसेज के पूर्व सचिव एम राजीवन ने कहा, अब यही रिवाज बन गया है कि जून में मॉनसून कमजोर रहता है और फिर वह सितंबर में इसे कवर करता है। 

उन्होंने कहा कि आर्किटिक सागर में पिघलती बर्फ और पश्चिमी  विक्षोभों की वजह से यह परिवर्तन हुआ है। हालांकि अभी स्पष्ट कारण नहीं पता है। जब तक पश्चिमी हवाएं चलती हैं तब तक मॉनसूनी हवाएं ठीक से सेट नहीं हो पातीं। इन हवाओं की वजह से उत्तर पश्चिमी भारत में भी गर्म दिनों की संख्या बढ़ जाताी है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ की वजह से राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश हो जाती है। 

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश में अब पश्चिमी विक्षोभ लगातार बढ़ रहे हैं. इससे उत्तर पश्चिम हिमालय में बर्फबारी कमह हो रही है और ऊंचाई वाले इलाके में ड्राई डे की संख्या बढ़ रही है। फिलहाल मॉनसून आने की तारीख में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। अब भी यह 1 जून को केरल पहुंचता है। वहीं जून-जुलाई में बारिश कम हुई है लेकिन सितंबर में बढ़ गई है। मौसम विभाग का यह भी कहना है कि मॉनसून के महीनों में ज्यादा गर्मी भी चिंता बढ़ा रही है। यह जलवायु परिवर्तन का असर है। अगर तापमान बढ़ता है तो आर्द्रता भी बढ़ जाती है।