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मुस्लिमों के गढ़ में भगवान कल्कि कैसे करेंगे कमाल, दो की लड़ाई में भाजपा के बाजी मारने की क्या उम्मीद?

Lok Sabha Election: इस बार भाजपा की नजर न सिर्फ मुस्लिम वोटबैंक में सेंधमारी करने की है बल्कि यादव और दलित वोटबैंक में भी सेंध लगाने और भगवान कल्कि के सहारे हिन्दुत्व की बैसाखी पर संभल जीतने की है।

मुस्लिमों के गढ़ में भगवान कल्कि कैसे करेंगे कमाल, दो की लड़ाई में भाजपा के बाजी मारने की क्या उम्मीद?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 01 May 2024 07:58 PM
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Uttar Pradesh Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश की कुल 94 सीटों पर 7 मई को वोट डाले जाने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 संसदीय सीटें भी शामिल हैं। इस चरण में यूपी में जहां चुनाव होने हैं, उनमें संभल, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदांयू, आंवला और बरेली शामिल हैं। 2019 के चुनावों में इनमें से आठ सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी लेकिन संभल और मैनपुरी में सपा की साइकिल दौड़ी थी। संभल में तब सपा के दिग्गज ने शफीकुर्रहमन बर्क ने जीत दर्ज की थी जबकि मैनपुरी से सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव जीते थे।

अब दोनों ही समाजवादी नेताओं का निधन हो चुका है। संभल से शफीकुर्रहमन बर्क के पोते जियाउर्रहमान बर्क को सपा ने उतारा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करीब 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित संभल मुस्लिम बहुल इलाका है, जहां मुसलमानों की आबादी करीब 35 फीसदी है। यह परंपरागत रूप से सपा का गढ़ रहा है। 1998 और 1999 में खुद मुलायम सिंह यादव यहां से जीत चुके हैं, जबकि 2004 में रामगोपाल सिंह यादव जीते हैं। 2014 में सिर्फ एक बार इस सीट से भाजपा की जीत हुई है लेकिन मोदी की प्रचंड लहर के बावजूद 2019 में भाजपा की यहां हार हुई थी क्योंकि तब सपा और बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था।

अब जब सपा और बसपा की राहें जुदा हैं, तब भाजपा फिर से यहां 2014 की जीत को दोहराना चाह रही है। 2019 में नंबर दो पर रहे  परमेश्वर लाल सैनी को भाजपा ने फिर से उम्मीदवार बनाया है। तब भाजपा को सपा के मुकाबले पौने दो लाख कम वोट मिले थे। 2014 में जब सपा और बसपा ने अलग-अलग चुनाव सड़ा था, तब भाजपा के सत्यपाल सिंह सैनी चुनाव जीते थे। उन्हें 3.60 लाख जबकि सपा के शफीकुर्रहमान बर्क को 3.55 लाख और बसपा के अकील उर रहमान को 2.52 लाख वोट मिले थे। कहना न होगा कि 2019 में सपा-बसपा की एकता की वजह से मुस्लिम वोट नहीं बंट सका और गठबंधन को 6.58 लाख वोट मिले।

इस बार भाजपा की नजर न सिर्फ मुस्लिम वोटबैंक में सेंधमारी करने की है बल्कि यादव और दलित वोटबैंक में भी सेंध लगाने और भगवान कल्कि के सहारे हिन्दुत्व की बैसाखी पर संभल का दरिया पार करने की है। इसके लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में ही बड़ी पहल कर चुके हैं। उन्होंने 19 फरवरी को कल्कि मंदिर की आधारशिला रखी थी।

माना जाता है कि कल्कि भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार हैं, जिनका अभी तक जन्म नहीं हुआ है। ऐसी मान्यता है कि कलयुग की समाप्ति के लिए भगवान विष्णु के ये दसवें अवतार संभल ही प्रकट होंगे। कांग्रेस से निष्कासित नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने यहां कल्कि भगवान को समर्पित मंदिर बनाया है। इस क्षेत्र में उनकी अच्छी पैठ है, जो अब भाजपा के साथ जुड़ चुके हैं। भाजपा प्रमोद कृष्णम और कल्कि अवतार के भरोसे क्षेत्र में धार्मिक और राजनीतिक तौर पर ध्रुवीकरण कर रही है।

इस बीच, श्री कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने TOI को बताया है कि काशी, अयोध्या और मथुरा के बाद, कल्कि पीठ को एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री द्वारा किए गए शिलान्यास से भी जोड़ा। चुनावी मौसम में भाजपा का यह दांव पश्चिमी यूपी के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है। दावा किया जाता है कि कथित तौर पर हिंदू वोट अब तक क्षेत्रीय दलों (सपा,बसपा) से जुड़े विभिन्न समूहों में बंटा हुआ था लेकिन भाजपा का कल्कि दांव उन्हें ना सिर्फ लामबंद करेगा बल्कि भाजपा को जीत दिलाने का एक सहारा भी बनेगा।

हालांकि, आचार्य प्रमोद कृष्णम 2014 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर संभल से हार चुके हैं। उन्हें मात्र 16 हजार वोट मिले थे। इसके अलावा पूर्व विधायक सौलत अली भी कांग्रेस से अलग हो चुके हैं और वह इस बार बसपा के उम्मीदवार हैं। अली सपा उम्मीदवार बर्क के विधानसभा चुनाव में भी मददगार रहे हैं लेकिन उनके हटने से बर्क के वोट बैंक में बिखराव की आशंका है।

कई राजनीतिक विश्लेषक भी इस बात को मानते हैं कि इस बार संभल क्षेत्र में कल्कि प्रभाव एक बड़ा कारक हो सकता है क्योंकि भाजपा ने इस क्षेत्र में जाति की राजनीति के प्रभाव को कम करने के लिए धर्म का कुशलतापूर्वक उपयोग किया है। ऐसे में भाजपा के कल्कि दांव से हिंदू मतदाता पार्टी के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं।