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केजरीवाल को दी जमानत; मिलिए जस्टिस खन्ना से जो CJI चंद्रचूड़ के बाद बनेंगे भारत के चीफ जस्टिस

बता दें कि जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने ही हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी है। वे इसी साल के आखिरी में देश के चीफ जस्टिस बनने वाले हैं।

केजरीवाल को दी जमानत; मिलिए जस्टिस खन्ना से जो CJI चंद्रचूड़ के बाद बनेंगे भारत के चीफ जस्टिस
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 15 May 2024 10:21 PM
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CJI Chandrachud News: सीजेआई चंद्रचूड़ इसी साल के नवंबर महीने में रिटायर होने वाले हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड से लेकर कई मामलों में सीजेआई चंद्रचूड़ के फैसले लंबे समय तक याद किए जाएंगे। उन्होंने 9 नवंबर, 2022 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पद की शपथ ली थी और लगभग दो साल के कार्यकाल के बाद वे इसी साल 10 नवंबर को रिटायर होंगे। ऐसे में लोग यह जानना चाह रहे हैं कि अगला सीजेआई कौन बनेगा? जस्टिस संजीव खन्ना अगले सीजेआई होंगे, जोकि 11 नवंबर, 2024 को पद संभालेंगे। वे देश के 51वें सीजेआई होने जा रहे हैं। बता दें कि जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने ही हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी है।

सुप्रीम कोर्ट की परंपरा के अनुसार, शीर्ष अदालत का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश भारत का मुख्य न्यायाधीश बनता है। वरिष्ठता के अनुसार, जस्टिस संजीव खन्ना अगले सीजेआई बनने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनका कार्यकाल छह महीने के लिए ही होने वाला है और मई, 2025 में रिटायर हो जाएंगे। जस्टिस संजीव खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता जस्टिस देव राज खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट के जज के रूप में रिटायर हुए, जबकि उनकी मां श्रीमती सरोज खन्ना एलएसआर, डीयू में हिंदी की लेक्चरार थीं। जस्टिस संजीव खन्ना ने अपनी स्कूली शिक्षा नई दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से की है और 1977 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और स्कूली शिक्षा के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के कैंपस लॉ सेंटर (सीएलसी) में लॉ की पढ़ाई की है।

जस्टिस संजीव खन्ना जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट हुए थे। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में खन्ना की नियुक्ति ने विवाद पैदा कर दिया था क्योंकि उम्र और अनुभव में उनसे 33 न्यायाधीश वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति मिली थी। हालांकि, बाद में यह विवाद शांत हो गया। जस्टिस खन्ना सुप्रीम कोर्ट से पहले दिल्ली हाई कोर्ट में 14 साल तक न्यायाधीश रहे। कराधान और अन्य वाणिज्यिक कानूनों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाने वाले खन्ना ने पिछले दो दशकों में विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णय लिखे हैं। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उनके प्रोफाइल के अनुसार, "जस्टिस खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट में अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में और न्यायालय द्वारा न्याय मित्र के रूप में नियुक्ति पर भी कई आपराधिक मामलों में बहस की थी। अप्रैल 2024 में जस्टिस खन्ना ने वोटर वेरिफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) के साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में डाले गए वोटों के क्रॉस-वैरिफिकेशन के लिए डाली गई याचिका पर भी सुनवाई की थी।

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