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नहीं रहे अयोध्या में राम मंदिर के 'सबूत' देने वाले अरुण कुमार, ऐतिहासिक खुदाइयों में दर्ज है नाम

मनीष शर्मा ने बताया कि उनके पिता द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में विवादित स्थल पर सुनवाई के दौरान स्वीकार किया था।

नहीं रहे अयोध्या में राम मंदिर के 'सबूत' देने वाले अरुण कुमार, ऐतिहासिक खुदाइयों में दर्ज है नाम
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,रायपुरFri, 01 Mar 2024 11:02 AM
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प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ अरुण कुमार शर्मा का बुधवार देर रात 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर शहर में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। अरुण कुमार शर्मा उस टीम के सबसे सीनियर सदस्य थे, जिसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर राम जन्मभूमि अयोध्या स्थल की खुदाई की थी। खुदाई के बाद उन्होंने रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कहा गया था कि मस्जिद बनाने के लिए एक मंदिर को तोड़ा गया था।

अरुण कुमार शर्मा को 2017 में भारत के दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया था। 12 नवंबर 1933 को रायपुर जिले के चंदखुरी में जन्मे शर्मा ने 1958 में सागर विश्वविद्यालय से एमएससी (मानव विज्ञान) की पढ़ाई पूरी की थी और एक साल बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) में शामिल हो गए। 

एएसआई में शामिल होने के बाद, उन्होंने पुरातत्व में दो साल का डिप्लोमा किया और उस साल वे ऑल इंडिया टॉपर थे। जिसके लिए उन्हें मौलाना अबुल स्वर्ण पदक मिला था। 33 वर्षों की सेवा के बाद, वह 1992 में एएसआई नागपुर के अधीक्षक पुरातत्वविद् के पद से सेवानिवृत्त हुए। 1994 से वह छत्तीसगढ़ सरकार के पुरातत्व सलाहकार रहे।

अरुण शर्मा के बेटे मनीष शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार तड़के राज्य की राजधानी रायपुर स्थित अपने आवास पर उनके पिता ने अंतिम सांस ली। वह 91 वर्ष के थे। राज्य के प्रसिद्ध पुरातत्वविद अरुण कुमार शर्मा ने अयोध्या के विवादित स्थल पर एक हिंदू मंदिर के अस्तित्व के समर्थन में पुरातात्विक साक्ष्य एकत्र किए थे। मनीष शर्मा ने बताया कि उनके पिता द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में विवादित स्थल पर सुनवाई के दौरान स्वीकार किया था।

मनीष शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सेवा के दौरान अरूण कुमार शर्मा सिरपुर, तरीघाट, सिरकट्टी, आरंग, ताला, मल्हार जैसे कई स्थानों पर खुदाई में शामिल थे। उन्होंने बताया, ''सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने पुरातत्व स्थलों-- सिरपुर (छत्तीसगढ़) और मानसर (महाराष्ट्र) में खुदाई में एएसआई की सहायता की थी। एएसआई में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने पूरे भारत में, विशेषकर गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू, महाराष्ट्र, लक्षद्वीप, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पुरातात्विक स्थलों की खुदाई की और उनके बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की।''

मनीष ने कहा, '' पुरातत्व पर उनकी 35 किताबें प्रकाशित हुईं। जब बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि अयोध्या मामले की सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में चल रही थी तब अरूण कुमार शर्मा इस मामले के प्रमुख गवाह थे। उन्होंने अदालत की संतुष्टि के लिए यह साबित किया कि वहां भगवान राम का मंदिर था और मस्जिद को मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया था।'' उन्होंने बताया कि 2016 में बस्तर क्षेत्र के दंतेवाड़ा जिले के ढोलकल पर्वत पर भगवान गणेश की मूर्ति को खंडित करने के एक सप्ताह के भीतर अरूण कुमार शर्मा ने अपनी टीम के साथ मिलकर मूर्ति को फिर से स्थापित किया था।

(इनपुट एजेंसी)

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