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कौन हैं नीतीश के हनुमान, जिन्होंने पहले बनवाई थी राजद संग सरकार; अब बने NDA गठबंधन के कर्णधार

Bihar Politics: अभी जब हाल ही में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तब इंडिया अलायंस के नेताओं ने वहां जाने से इनकार कर दिया था पर नीतीश ने ना तो इनकार किया था और ना ही आगे बढ़कर स्वीकार किया था।

कौन हैं नीतीश के हनुमान, जिन्होंने पहले बनवाई थी राजद संग सरकार; अब बने NDA गठबंधन के कर्णधार
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 28 Jan 2024 06:58 PM
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Bihar Politics: नीतीश कुमार नौवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं। साल 2000 से लेकर आज तक वह नौ में से तीन बार राजद के सहयोग से तो छह बार बीजेपी के सहयोग से सीएम बने हैं। उनके बारे में कहा जाता रहा है कि जब वो किसी दल के साथ गठबंधन का नया दरवाजा खोलते हैं तो पीछे से दो दरवाजे दूसरे दलों के साथ खोल देते हैं और सियासी बातचीत, चर्चा और जोड़-तोड़ की प्रक्रिया समानांतर तरीके से चलाते रहते हैं। 

नीतीश कुमार हमेशा से अपने भरोसेमंद दूतों के जरिए इस तरह की सियासी गुप्त मंत्रणा करते रहे हैं। 17 महीने के अलगाव के बाद फिर से बीजेपी संग दोस्ती पटरी पर लाने और राज्य में नई सरकार बनाने में फिर एक दूत की भूमिका प्रमुख रही है। हैरत की बात यह है कि इसी दूत ने 17 महीने पहले राजद संग भी गठबंधन कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उस दूत का नाम है संजय झा। जी, वही संजय झा, जो नीतीश सरकार में जल संसाधन मंत्री थे। माना जा रहा है कि नई सरकार में उन्हें फिर से मंत्री बनाया जाएगा।

आज जब जेडीयू विधायक दल की बैठक में राजद से गठबंधन तोड़कर बीजेपी संग मिलकर नई सरकार बनाने का फैसला हुआ, तब बीजेपी को सरकार गठन के न्योते की चिट्ठी देने वही संजय झा पटना के वीरचंद पटेल स्थिति बीजेपी मुख्यालय पहुंचे थे और थोड़ी देर बाद वहां से नीतीश को बीजेपी के समर्थन की चिट्ठी लेकर वापस आए थे।

अयोध्या में नीतीश के दूत कौन?
अभी जब हाल ही में 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तब इंडिया अलायंस के तमाम नेताओं ने वहां जाने से इनकार कर दिया था लेकिन नीतीश ने ना तो इनकार किया था और ना ही आगे बढ़कर स्वीकार किया था। उन्होंने बीच-बीच का रास्ता अपनाते हुए कहा था कि समय मिलेगा तो जाएंगे या कोई उनका प्रतिनिधि बनकर जाएगा। उस वक्त भी संजय झा या विजय चौधरी के नीतीश के दूत बनने की खबर सामने आई थी।

कौन हैं संजय झा
संजय झा जेडीयू के विधान पार्षद हैं। वह पार्टी के महासचिव भी हैं। पिछली सरकार में वह जल संसाधान और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री थे। 46 वर्षीय झा नीतीश के करीबी नेताओं में से एक हैं। मिथिलांचल के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने जेएनयू से एमए किया है। 2021 में जब कुशेश्वरस्थान और तारापुर विधानसभा सीट पर उप चुनाव हुए तो वहां भी झा ने नीतीश का दूत बनकर खूब मेहनत की और दोनों सीटें पार्टी की झोली में डालने में सफल रहे। धीर-धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता चला गया। वह तीन बार नीतीश कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं। चौथी बार फिर मंत्री बनने की राह पर हैं।

झा के अलावा और भी हैं दूत
कहा जा रहा है कि संजय झा के अलावा नीतीश कुमार के और भी दूत हैं। इनमें राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश का भी नाम है। उन्हें बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों के बीच की कड़ी कहा जा रहा है। विजेंद्र यादव ने भी संजय झा के साथ 17 महीने पहले राजद संग सरकार बनवाने में नीतीश के दूत की भूमिका निभाई थी। कभी ललन सिंह भी इस भूमिका में थे लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह शक के दायरे में हैं। उन पर लालू परिवार से नजदीकियां बढ़ाने के आरोप हैं।

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