गुजरात में PM मोदी से भी ज्यादा की चुनावी रैलियां, हिमाचल में भी रहे नंबर-2, जानें- कौन हैं वो शख्स?
हिमाचल प्रदेश में पीएम मोदी ने दो दिन (5 और 9 नवंबर) को दो-दो यानी कुल चार रैलियों को संबोधित किया, जबकि होम मिनिस्टर अमित शाह ने 15 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच कुल 9 रैलियां की थीं।

गुजरात के हालिया चुनावों में बीजेपी ने जहां 182 सदस्यों वाली विधानसभा में 156 सीटें जीतकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है, वहीं एक शख्स ऐसे भी हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा चुनावी रैलियां और रोड-शो कर पीएम नरेंद्र मोदी से भी लंबी लकीर खींच दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में 19 नवंबर से 2 दिसंबर तक जहां कुल 27 रैलियाँ और 40 किलोमीटर लंबा एक रोड-शो अहमदाबाद में किया है, वहीं बीजेपी में नंबर दो कहलाने वाले यानी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने गृह राज्य में कुल 36 रैलियां की हैं। इनके बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नंबर है, जिन्होंने कुल 23 रैलियां की हैं।
पहाड़ी राज्य हिमाचल में भी चुनावी रैलियां करने के मामले में अमित शाह पीएम मोदी से आगे निकल गए हैं। हिमाचल प्रदेश में पीएम मोदी ने दो दिन (5 और 9 नवंबर) को दो-दो यानी कुल चार रैलियों को संबोधित किया, जबकि अमित शाह ने 15 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच कुल 9 रैलियां की थीं। इस पहाड़ी राज्य में बीजेपी की तरफ से सबसे ज्यादा चुनावी रैलियां बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने की। हिमाचल नड्डा का गृह राज्य है। यहां उन्होंने कुल 20 रैलियां कीं। योगी आदित्यनाथ ने भी पहाड़ी राज्य में पांच रैलियां की लेकिन उनकी पार्टी 68 सीटों में सिर्फ 25 ही जीत सकी।
हालांकि, जेपी नड्डा के लिए इस चुनाव में एकमात्र सांत्वना और संतोष की बात यह है कि उनकी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस के बीच का वोट शेयर का अंतर सिर्फ 0.9% था यानी कुल 37,974 वोट का ही अंतर रहा। कांग्रेस का वोट शेयर 43.9 प्रतिशत (18,52,504 वोट) था; जबकि बीजेपी ने 43 फीसदी (18,14,530 वोट) जीते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर मोदी और शाह समेत बीजेपी के नेताओं ने इस राज्य पर थोड़ा और ध्यान दिया होता तो क्या हिमाचल का रिवाज बदल सकता था और सत्ता को बरकरार रखा जा सकता था?
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


