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In-Depth: दुनिया में किसके पास कितना है रासायनिक हथियारों का जखीरा?

Chemical weapon

पिछले दिनों सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने युद्ध में नए तरह के हथियारों के ख़तरे से देश को आगाह किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु हथियारों (सीबीआरएन) के उपयोग का ख़तरा वास्तविक बनकर उभरा है। सेना प्रमुख ने कहा कि पारंपरिक सेना के विपरीत, सीबीआरएन से मुकाबला एक "अति अप्रत्याशित" वातावरण में करना होता है, जहां शत्रु भारत का मुकाबला करने के लिए "विषम" साधनों का उपयोग कर सकते हैं।

आइये बताते है कि क्या है सीबीआरएन? रासायनिक हथियारों के मामले में कौन है कितना अधिक शक्तिशाली?
 
रासायनिक युद्ध का अर्थ है - किसी युद्ध में रासायनिक पदार्थों के विषैले गुणों का उपयोग करके जन-धन की हानि पहुंचाना। रासायनिक युद्ध, परमाणु युद्ध (या, नाभिकीय युद्ध) से अलग है। सामान्य भाषा में नाभिकीय युद्ध, जैविक युद्ध तथा रासायनिक युद्ध को सम्मिलित रूप से महासंहारक हथियार  कहलाते हैं। रासायनिक युद्ध अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिये विस्फोटक बलों पर निर्भर नहीं करता है बल्कि रसायनों के विषकारी घातक प्रभावों पर निर्भर है।

2016 में 92 फीसदी कैमिकल भंडार खत्म 
कैमिकल वीपन्स कन्वेंशन (1993) के अंतर्गत कानूनी तौर पर रासायनिक हथियारों का उत्पादन, भंडारण या इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। हालांकि,1993 कैमिकल वीपन्स कन्वेंशन(सीडब्ल्यूसी) इसे नियंत्रित करन का सबसे हालिया समझौता है जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत मानना बाध्यकारी है। प्रतिबंध के बावजूद इसका कई देशों के पास अब भी जखीरा मौजूद है। सीब्ल्यूसी पर 192 हस्ताक्षर करनेवाले देशों में दुनिया की कुल आबादी का 98 फीसदी आबादी बसती है। जून 2016 तक इन देशों में कुल भंडार जून 2016 तक 72,525 मीट्रिक टन में से 66,368 टन भंडार को खत्म कर दिया गया। यानि 92 फीसदी भंडार को खत्म कर दिया गया। साल 2017 तक सिर्फ नॉर्थ कोरिया और अमेरिका ने ही इस बात की पुष्टि की है कि उनके पास कैमिकल हथियार है।

रूस
रुस जिस वक्त सीडब्ल्यूसी पर दस्तख़त किया था उस वक्त उसके पास कैमिकल हथियारों का सबसे बड़ा भंडार था। लेकिन, 2010 आते आते उसने 18,241 टन्स कैमिकल को खत्म कर दिया। जबकि, साल 2016 तक रूस ने अपने 94 फीसदी कैमिकल वीपन्स खत्म कर दिए और बाकी कैमिकल 2018 के अंत तक खत्म करने का लक्ष्य रखा है।

यूनाईटेड स्टेट्स
यूएस ने कैमिकल हथियारों का जखीरा देश के अमेरिकी प्रायद्वीप के आठ सैन्य प्रतिष्ठानों में भंडारण किया हुआ था। हालांकि, इनमें से कई जगहों पर कैमिकल हथियारों को खत्म किया जा रहा है। अमेरिका ने कैमिकल वीपन्स को जवाबी तौर पर इस्तेमाल के अपने अधिकार को सुरक्षित कर रखा है। सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति ही जवाबी कार्रवायी में कैमिकल हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत दे सकता है।      

नॉर्थ कोरिया
नॉर्थ कोरिया ने सीडब्ल्यूसी पर हस्ताक्षर नहीं किया है और उसके कैमिकल कार्यक्रम के बारे में कभी भी आधिकारिक तौर पर नहीं जाना जा सका है। लेकिन, ऐसा माना जा रहा है कि उसके पास पर्याप्त मात्रा में रासायनिक हथियारों का भंडार है। ऐसा कहा जा रहा है कि नॉर्थ कोरिया ने रासायनिक हथियार बनाने के लिए जरूरी टर्बुन और मस्टर्ड गैस 1950 से भी पहले ही हासिल कर ली थी। साल 2009 में इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने आपसी सहमति जताते हुए अंदेशा जताया था कि नॉर्थ कोरिया के पास करीब 2,500 टन से 5,000 टन कैमिकल वीपन्स का भंडार है।

भारत 
भारत 14 जनवरी 1993 को आधिकारिक तौर पर कैमिकल वीपन्स कंट्रीज (सीडब्ल्यूसी) पर हस्ताक्षर करने के बाद जून 1997 में 1044 टन्स सल्फर मस्टर्ड के भंडार की घोषणा की थी। साल 2006 तक भारत ने 75 फीसदी कैमिकल मैटीरियल को खत्म कर दिया। 14 मई 2009 को भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस बात का ऐलान किया कि उसने कैमिकल हथियारों के भंडार को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

इराक
कैमिकल वीपन्स पर नजर रखनेवाले 'द ऑर्गेनाइजेशन फॉर दी प्रोहिबिशन ऑफ कैमकल वीपन्स' ने साल 2009 में इस बात की घोषणा की थी कि इराक सरकार ने अपने सभी रासायनिक हथियारों संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के सामने जमा करा दिया है।  उसके बाद वह कैमिकल कन्वेंशन का 186वां सदस्य बना गया।

जापान
जापान ने कैमिकल हथियारों का 1937 से 1945 के दरम्यान किया था। हालांकि, सितंबर 2010 में चीन और जापान ने संयुक्त रूप से उसे खत्म करने का फैसला किया। 
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