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Hindi Newsदेश न्यूज़who gave SOS about the Wayanad tragedy lost his life to save others dead body found in waterfall - India Hindi News

जिसने दी वायनाड त्रासदी की पहली सूचना, दूसरों को बचाने में चली गई जान; झरने में मिला शव

वायनाड में भूस्खलन की सबसे पहली जानकारी देने वाली नीती जोजो का भी शव मिला है। उन्होंने अपने परिवार को तो सुरक्षित जगह भेज दिया लेकिन दूसरों की मदद करने के लिए खुद रुक गई थीं।

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान, वायनाडMon, 5 Aug 2024 02:31 AM
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वायनाड की त्रासदी की इतनी दर्दनाक कहानियां हैं, कि उन्हें बयां करना भी मुश्किल है। ऐसी ही एक कहानी है नीतू जोजो की। नीतू जोजो ही वह महिला हैं जिन्होंने सबसे पहले भूस्खलन की जानकारी दी थी और मदद मांगी थी। उन्होंने अपने पति और पांच साल के बच्चे को तो इस संकट से दूर कर दिया लेकिन खुद दूसरों की जान बचाने के लिए मौत से लड़ गईं। घटना के कई दिनों के बाद उनका शव एक झरने के पास से बरामद हुआ है। एक कंगन की मदद से पति जोजो ने नीतू की पहचान की। 

दरअसल मंगलवार को जब रात के करीब 1.30 बजे मौत का तांडव शुरू हुआ तो सबसे पहले नीतू ने ही वायनाड इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज  को फोन करके इसकी जानकारी दी थी। वह वहीं पर काम करती थीं। चूरलमाला में विनाशकारी भूस्खलन के बाद घर में फंसे अपने और कुछ अन्य परिवारों के लिए मदद मांगने वाली नीतू की कॉल की रिकॉर्डिंग वायरल हो गई है। रिकॉर्डिंग में उन्हें 30 जुलाई की सुबह में हुई भयावहता का विवरण बताते सुना जा सकता है, जब उनका घर भूस्खलन की चपेट में था। इस कॉल रिकॉर्डिंग में नीतू को यह कहते हुए सुना गया कि पानी उनके घर के अंदर बह रहा है, जो भूस्खलन में बह गई कारों सहित मलबे से घिरा हुआ था। वह कहती हैं कि उनके घर के पास रहने वाले पांच से छह परिवार प्रकृति के प्रकोप से बचकर उनके घर में शरण ले चुके हैं, जो तुलनात्मक रूप से सुरक्षित था। 

WIMS डिप्टी जनरल मैनेजर शानावास पेल्लियाल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि रात में जब नीतू का फोन आया तो उन्होंने बताया कि इलाके में बड़ा भूस्खलन हुआ है। पूरा इलाका ही खिसक रहा है। उन्होंने कहा कि बचाव के लिए कोई वाहन भेज दें। इसके बाद पेल्लियाल ने ऐंबुलेंस को रवाना किया। हालांकि वहां से चूरूमाला की दूरी 40 मिनट की थी। इसलिए उन्होंने नीतू को इंतजार करने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने मेप्पाडी पुलिस स्टेशन को फोन करने की कोशिश की लेकिन लाइन बिजी थी। इसके बाद कालपेट्टा स्टेशन पर फोन किया लेकिन वहां के पुलिसकर्मियों को कुछ जानकारी ही नहीं थी। इसके बाद 100 नंबर पर फोन करके तिरुवनंतपुरम कंट्रोल रूम को जानकारी दी गई। 

मेडिकल कॉलेज से एक ऐंबुलेंस नीतू के घर की ओर जा रही थी लेकिन नदी पर बने पुल पर मलबा इकट्ठा हो चुका था। उखड़े हुए पेड़ों ने रास्ता रोक दिया था। ऐसे में ऐंबुलेंस आगे बढ़ ही नहीं पाई। वहीं एक ओमनी वैन क किसी तरह भेजा गया। वहीं नीतू ने जब देखा कि घर में लगातार मलबा और पानी भर रहा है तो उन्होंने अपने पति को पांच साल के बेटे और उनके मां-बाप के साथ तुरंत बाहर जाने को कहा। लोगों की सेवा देने की आदत ने नीतू को वहीं रोक लिया। उन्होंने पति से आगे चलने को कहा और बताया कि थोड़ी देर में वह भी आ जाएंगी। उनके घर में कई पड़ोसी भी आ गए थे। सुबह 4 बजे के करीब बड़ा भूस्खलन हुआ और उनका घर भी चपेट में आ गया। पास बहने वाली नदी ने रास्ता बदल लिया और पड़ोसियों समेत वह बह गईं। नीतू का शव सूचीमाला झरने में मिला। 
 

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