ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News देशलाहौर बचा लिया, यही बहुत है... अमेरिकी 'चाणक्य' हेनरी किसिंजर ने 1971 में मानी थी भारत से हार

लाहौर बचा लिया, यही बहुत है... अमेरिकी 'चाणक्य' हेनरी किसिंजर ने 1971 में मानी थी भारत से हार

अमेरिका के विदेश मंत्री रहे हेनरी किसिंजर का 100 साल की उम्र में निधन हो गया है। 1971 की जंग में उनकी भूमिका अहम थी और वह पाकिस्तान के पाले में थे। इसके बाद भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी।

लाहौर बचा लिया, यही बहुत है... अमेरिकी 'चाणक्य' हेनरी किसिंजर ने 1971 में मानी थी भारत से हार
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 30 Nov 2023 11:01 AM
ऐप पर पढ़ें

अमेरिका के विदेश मंत्री रहे हेनरी किसिंजर का 100 साल की उम्र में निधन हो गया है। वैश्विक राजनीति में दो सदियों का अनुभव रखने वाले किसिंजर को अमेरिका की कोल्ड वॉर की नीति का जनक माना जाता था। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता किसिंजर ने दो राष्ट्रपतियों के साथ काम किया था। बुधवार को उनकी मौत हुई तो कई पुराने किस्से भी लोग साझा करने लगे। किसिंजर ने अपनी नीतियों से चीन और रूस तक को नाको चने चबवा दिए थे। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 की जंग में उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। यही नहीं उन्होंने खुद माना था कि भले ही पूर्वी पाकिस्तान चला गया और नया देश बन गया है, लेकिन हमने पश्चिमी पाकिस्तान बचा लिया।

ढाका जब 16 दिसंबर, 1971 को आजाद हुआ तो अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन से उनके सलाहकार हेनरी किसिंजर ने कहा था कि शुक्र है कि हमने पश्चिमी पाकिस्तान बचा लिया। इस तरह उन्होंने मान लिया था कि अमेरिका के लाख जतन के बाद भी भारत को रोका नहीं जा सका और पाकिस्तान की हार हुई। 1971 की जंग में अमेरिका का रुख पाक की ओऱ झुका दिख रहा था। ये बातें गोपनीय दस्तावेजों का हिस्सा थीं, जिसे अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बाद में उजागर किया था। पाकिस्तान के जनरल याहया खान के साथ हेनरी किसिंजर ने एक गुप्त मीटिंग भी की थी। उन्हें भरोसा था कि वह पूर्वी पाकिस्तान को अलग होने से बचा लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 

इस जंग में तो पाकिस्तान के जनरल एके नियाजी के नेतृत्व वाली पाक सेना ने सरेंडर कर दिया था। यह दस्तावेज साइन होने के 16 घंटे बाद ही किसिंजर ने निक्सन को लिखा था, 'बधाई हो राष्ट्रपति। आपने पश्चिमी पाकिस्तान बचा लिया है।' इस समझौते के बाद ही भारत की तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने 17 दिसंबर से पश्चिमी मोर्चे पर सीजफायर का ऐलान कर दिया था। इस तरह बांग्लादेश बच गया औऱ पाकिस्तानी पंजाब के मोर्चे से भारतीय सेना पीछे हट गई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी उस वाकये का जिक्र किया है।

उन्होंने कहा कि तब किसिंजर और निक्सन ने सिरदर्द बढ़ाया था, लेकिन इंदिरा गांधी और उनके सलाहकार पीएन हास्कर आगे निकले। जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, 'हेनरी किसिंजर का निधन हो गया है। वह जितना अपनी कूटनीति के लिए याद किए जाते हैं, उतना ही विवादित भी रहे हैं। उनकी लंबी जिंदगी में निंदा और सेलिब्रेशन दोनों शामिल हैं।' उन्होंने याद किया कि 1971 में वह भारत के खिलाफ चले गए थे, लेकिन बीते तीन दशकों से वह भारत के समर्थक बने हुए थे। 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें