ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News देशक्या है अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट, जिसके चलते तवा जैसे तप रहे दिल्ली समेत 17 शहर

क्या है अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट, जिसके चलते तवा जैसे तप रहे दिल्ली समेत 17 शहर

सवाल उठता है कि आखिर शहरी इलाकों में ही क्यों तापमान इतना चढ़ रहा है और उमस ज्यादा फील होने की वजह क्या है। इसका जवाब 'अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट' के तौर पर मिलता है, जो बीते कुछ सालों में बढ़ा है।

क्या है अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट, जिसके चलते तवा जैसे तप रहे दिल्ली समेत 17 शहर
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 28 May 2024 05:54 PM
ऐप पर पढ़ें

दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम यूपी और हरियाणा समेत उत्तर भारत के ज्यादातर इलाके में भीषण गर्मी का दौर है। सोमवार को तापमान दिल्ली में 48 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया और फीलिंग तो 50 डिग्री की आ रही थी। मंगलवार को भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। यही नहीं राजस्थान के फलोदी में यह 49 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ गया। दिल्ली, गुरुग्राम समेत देश के कुल 17 ऐसे शहर हैं, जहां तापमान 45 डिग्री के पार दर्ज हुआ है। दिन में लू के थपेड़े और रातें बेहद उमस भरी होने के चलते लोगों का जीना मुहाल हो गया है। खासतौर पर शहरी इलाकों में गर्मी ज्यादा महसूस हो रही है। 

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शहरी इलाकों में ही क्यों तापमान इतना चढ़ रहा है और उमस ज्यादा फील होने की वजह क्या है। इसका जवाब 'अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट' के तौर पर मिलता है। अर्बन हीट आईलैंड उस अवस्था को कहते हैं, जब शहरी इलाकों का विकास इस कदर हो जाए कि वहां प्राकृतिक कवर खत्म सा हो जाए। यानी हरियाली खत्म हो और वहां कंक्रीट से जमीन पट जाए। दिल्ली और आसपास के बड़े दायरे में ऐसी ही स्थिति हो गई है। सड़कें, मॉल, पक्की कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां कंक्रीट का जंगल है। लेकिन प्राकृतिक वन का नामोनिशान नहीं है।

हीटस्ट्रोक के मरीजों की कैसे तेजी से बढ़ रही संख्या

ऐसी स्थिति में गर्मी प्रचंड रूप धारण कर रही है। इसके अलावा शहरों के ऐसे निर्माण और फिर गाड़ियों की अधिक संख्या एवं घरों में टंगे तमाम एयरकंडीशनर्स के चलते भी ऐसी स्थिति पैदा हुई है। ऐसी स्थिति से बढ़ी गर्मी को ही 'अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट' कहा जाता है। ऐसा होने पर बिजली की खपत बढ़ती है। एयर पलूशन अधिक होता है। इसके अलावा गर्मी से संबंधित बीमारियां और उससे मौतों तक का आंकड़ा बढ़ जाता है। बीते कुछ दिनों का आंकड़ा इसकी तस्दीक भी करता है। राजस्थान में हीटस्ट्रोक के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ते हुए 3622 हो गई है।

कैसे दिल्ली-एनसीआर में दिख रहा असर, क्या है उपाय

इसके अलावा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद में भी ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों तक में हीटस्ट्रोक के मरीजों के लिए वार्ड तैयार किए गए हैं। यमुना जैसी नदी का सूखने के हद तक जलस्तर कम होना और तालाब आदि जलायश खत्म जैसे होने की स्थिति ने भी संकट बढ़ाया है। वहीं ऐसे इलाके की तुलना में उन ग्रामीण इलाकों में हालात थोड़े बेहतर पाए जाते हैं, जहां पेड़-पौधे अधिक हों। इससे मौसम में नमी बनी रहती है।

Advertisement