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चंद्रयान-3 की सफलता के बाद क्या है प्राथमिकता, ISRO चीफ एस. सोमनाथ ने बताई प्लानिंग

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कई लक्ष्यों पर काम कर रहा है। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा कि गगनयान मिशन एजेंसी की तत्काल प्राथमिकता है। गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम है।

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद क्या है प्राथमिकता, ISRO चीफ एस. सोमनाथ ने बताई प्लानिंग
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,कोलकाताWed, 29 Nov 2023 06:57 PM
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इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ का कहना है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कई लक्ष्यों पर काम कर रहा है। इसरो चीफ ने कहा कि गगनयान मिशन एजेंसी की तत्काल प्राथमिकता है। बता दें गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम है। सोमनाथ ने कहा, "हमारे पास कई प्रोजेक्ट्स हैं लेकिन अभी हमारा प्राथमिक लक्ष्य गगनयान है। किसी भारतीय को अंतरिक्ष में भेजना और सुरक्षित वापस लाना हमारे लिए मौजूदा वक्त की प्राथमिकता है।'' इसरो चीफ कोलकाता के राजभवन में वैश्विक ऊर्जा संसद के 2023 सत्र से इतर मीडिया से बात कर रहे थे। बुधवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। बोस ने सोमनाथ को राज्यपाल उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया।

क्या है इसरो की प्लानिंग

गगनयान मिशन का लक्ष्य मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजना है। तीन दिवसीय इस मिशन के तहत इसरो के अंतरिक्ष यान को 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा, उसके बाद इसे वापस धरती पर लाया जाएगा। सोमनाथ ने यह भी कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी की योजना है भारत के अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक स्थापित हो जाए और इसे 2035 तक पूरी तरफ से एक्टिव किया जाएगा। इस साल की शुरुआत में अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष एजेंसी को 2040 तक चंद्रमा पर एक मानवयुक्त मिशन का लक्ष्य रखने और 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का निर्देश दिया था।

नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी 2024 के अंत तक एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को आईएसएस के लिए उड़ान भरने के लिए प्रशिक्षित करने में मदद करेगी। सोमनाथ ने यह भी कहा कि सूर्य का अध्ययन करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष-आधारित मिशन आदित्य एल1 अपने रास्ते पर है, उन्होंने कहा, "हमारी उम्मीद है कि यह 7 जनवरी तक लैग्रेंज पॉइंट 1 (एल1) में प्रवेश कर जाएगा।'' अंतरिक्ष यान को एल1 के आसपास रखा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर है। एल1 वह बिंदु है जहां ग्रहण के प्रभाव का कोई असर नहीं होगा।

चंद्रयान-3 है प्रेरणा: इसरो चीफ

सोमनाथ ने कहा, ''चंद्रयान-3 ने हर किसी के लिए प्रेरणा पैदा की है। हम चंद्रमा पर कोई यान उतारने वाले चौथे और दक्षिणी भाग पर उतरने वाले पहले देश हैं। यह सब दर्शाता है कि भारत का वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग कौशल बहुत ऊंचा है। हम स्पेस क्राफ्ट के निर्माण और मिशन योजना के लिए किसी पर निर्भर नहीं थे। हमने कई लोगों से सलाह ली। पूरी सृष्टि हमारी अपनी है।" इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, चंद्रयान-3 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। 

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