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हिंदी न्यूज़ देशदुश्मन की राडार पर प्रहार करेगी भारतीय वायुसेना, इस मिसाइल पर 1,400 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी; इसलिए है जरूरी

दुश्मन की राडार पर प्रहार करेगी भारतीय वायुसेना, इस मिसाइल पर 1,400 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी; इसलिए है जरूरी

भारत में बनाई गई ये ऐसी पहली मिसाइल है, जो किसी भी ऊंचाई से दागी जा सकती है। ये मिसाइल किसी भी तरह के सिग्नल और रेडिएशन को पकड़ सकती है। साथ ही अपनी रेडार में लाकर ये मिसाइल नष्ट कर सकती है।

दुश्मन की राडार पर प्रहार करेगी भारतीय वायुसेना, इस मिसाइल पर 1,400 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी; इसलिए है जरूरी
Amit Kumarएएनआई,नई दिल्लीThu, 24 Nov 2022 08:03 PM

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भारतीय वायुसेना (IAF) अब दुश्मन की रडार पर प्रहार करने की तैयारी शुरू कर रही है। इसके लिए IAF को अगली पीढ़ी की नई मिसाइलें चाहिए। हालांकि स्वदेशी रूप से विकसित हथियार प्रणालियों को शामिल करने के अपने लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए सेना ने नई मिसाइलों का ऑर्डर देने का प्लान बनाया है। भारतीय वायु सेना ने नेक्स्ट जेनरेशन एंटी-रेडिएशन मिसाइल (NGARM) रुद्रम को हासिल करने के लिए सरकार को 1,400 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव दिया है। इस मिसाइल के जरिए वायुसेना दुश्मन के राडार स्थानों को खोजकर उन्हें नष्ट कर सकती है। रुद्रम डीआरडीओ के रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक हवा से सतह में मार करने वाली स्वदेशी एंटी रेडिएशन मिसाइल है।

रक्षा अधिकारियों ने एएनआई को बताया, "रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित एडवांस मिसाइलों को खरीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के पास है और जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक इस पर विचार करेगी।" उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी की विकिरण रोधी (एंटी-रेडिएशन) मिसाइलों का भारतीय वायु सेना द्वारा अपने सुखोई-30 लड़ाकू विमान से पहले ही परीक्षण किया जा चुका है। यह मिसाइल युद्ध के दौरान दुश्मन के रडार स्थानों को नष्ट कर सकती है। अधिकारियों ने कहा कि रडार सिस्टम के नष्ट होने से भारतीय वायु सेना को बिना पता लगाए लक्ष्यों को भेदने में मदद मिल सकती है। NGARM को सुखोई-30 और मिराज-2000 जैसे IAF लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। यह सटीक है और रडार सिस्टम को ट्रैक करने की क्षमता के साथ विकसित की गई है। यह मिसाइल रडार सिस्टम को तब भी ट्रैक जब वह भले ही यह काम न कर रहा हो।

NGARM भारत की पहली स्वदेशी रूप से एंटी-रेडिएशन रोधी मिसाइल है। इस मिसाइल की लॉन्च स्पीड आवाज की गति से भी दोगुनी (सुपरसोनिक) है। यह मिसाइल हवा में भारतीय लड़ाकू विमान की मारक क्षमता को बढ़ाएगी और टैक्टिकल कैपेबिलिटी को भी बढ़ाएगी। इससे भारतीय वायुसेना को दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को काफी अंदर जाकर उसे नष्ट करने की क्षमता हो गई है। भारत में बनाई गई ये ऐसी पहली मिसाइल है, जो किसी भी ऊंचाई से दागी जा सकती है। ये मिसाइल किसी भी तरह के सिग्नल और रेडिएशन को पकड़ सकती है। साथ ही अपनी रेडार में लाकर ये मिसाइल नष्ट कर सकती है।

बता दें कि रेडिएशन मिसाइलें वे मिसाइलें होती हैं जिन्‍हें दुश्‍मन के कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम को ध्‍वस्‍त करने के लिए बनाया जाता है। ये दुश्‍मन के रेडार, जैमर्स और यहां तक कि बातचीत के लिए इस्‍तेमाल होने वाले रेडियो के खिलाफ भी इस्तेमाल की जा सकती हैं। इन मिसाइलों में सेंसर लगे होते हैं जो रेडिएशन का सोर्स ढूंढते हैं। उसके करीब जाते ही मिसाइल फट जाती है।

NGARM को शामिल करना भारतीय वायु सेना के लिए एक बड़ी ताकत साबित होगा। हाल ही में, एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध से सीखे गए सबक के आधार पर, भारतीय वायु सेना 'भारत में बने हथियारों' को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।  

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