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क्या है जगन्नाथ मंदिर का 'रत्न भंडार' विवाद, PM मोदी ने क्या कह दिया कि ओडिशा से तमिलनाडु तक मच गया बवाल

Odisha Ratna Bhandar Controversy: ओडिशा के पुरी स्थित 862 साल पुराने जगन्नाथ पुरी मंदिर के अंदर एक खजाना है, जिसे 'रत्न भंडार' भी कहा जाता है। यह 40 साल से बंद है।आखिरी बार इसे 1984 में खोला गया था।

क्या है जगन्नाथ मंदिर का 'रत्न भंडार' विवाद, PM मोदी ने क्या कह दिया कि ओडिशा से तमिलनाडु तक मच गया बवाल
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 22 May 2024 03:48 PM
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Odisha Ratna Bhandar Controversy:  लोकसभा चुनावों के साथ-साथ ओडिशा में विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं, इसलिए वहां स्थानीय मुद्दे भी चुनावों में छाए हुए हैं। इसी में एक अहम है जगन्नाथ पुरी मंदिर के रत्न भंडार का मुद्दा। सोमवार को ओडिशा के गुल और कटक में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रत्न भंडार की गुम हुई चाबियों का मुद्दा उठाया और पूछा कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल (बीजद) ने इस मामले पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को क्यों दबाया। पीएम मोदी ने सीएम पटनायक के खास और बीजद के स्टार प्रचारक पूर्व आईएएस अधिकारी वी के पांडियन के तमिल मूल के मुद्दे पर भी निशाना साधा और कहा कि ये चाबियां तमिलनाडु जा सकती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मामले में बीजद की भूमिका संदिग्ध है। ओडिशा में भाजपा की सरकार बनने के बाद वह रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी।" उनके बाद अगले ही दिन मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नयागढ़ की रैली में कहा कि नवीन पटनायक को पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गुम हुईं चाबियों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। दरअसल, ओडिशा में यह एक भावनात्मक मुद्दा रहा है, जिसे भाजपा मौजूदा चुनावों में भुनाना चाह रही है।

क्या है रत्न भंडार?
ओडिशा के पुरी स्थित 862 साल पुराने जगन्नाथ पुरी मंदिर के अंदर एक खजाना है, जिसे 'रत्न भंडार' भी कहा जाता है। यह भंडार पिछले 40 साल से बंद है। आखिरी बार इसे 1984 में खोला गया था। मंदिर के इस खजाने में अनुमानतः 149 किलो सोना और 258 किलो चांदी के आभूषण हैं। इन आभूषणों पर बेशकीमती पत्थर भी चढ़े हुए हैं। ये सभी भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के बहुमूल्य आभूषण हैं जो वर्षों से भक्तों, अनुयायियों और पूर्व राजाओं ने उपहार में दिए हैं और रत्न भंडार में रखे हुए हैं। 

12वीं शताब्दी में बनाए गए इस मंदिर के रत्न भंडार में दो कक्ष हैं। एक बाहरी कक्ष और दूसरा आंतरिक कक्ष। बाहरी कक्ष को  प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों के अवसर पर खोला जाता है और वहां से देवताओं के आभूषण लाया जाता रहा है लेकिन आंतरिक कक्ष को पिछले 40 साल से नहीं खोला गया है। आखिरी बार आंतरिक कक्ष यानी मूल रत्न भंडार को 14 जुलाई 1985 को खोला गया था।

क्यों हुई न्यायिक जांच?
अप्रैल 2018 में ओडिशा विधानसभा में तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने इससे जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा था कि 1978 में रत्न भंडार में 12,831 भारी (एक भारी 11.66 ग्राम के बराबर) सोने के आभूषण थे, जिनमें कीमती पत्थर लगे हुए थे और 22,153 भारी चांदी के बर्तन और अन्य कीमती सामान थे। अन्य आभूषण भी थे जिनका वजन लिस्टिंग की प्रक्रिया के दौरान नहीं किया जा सका था। उसी साल 4 अप्रैल 2018 को उड़ीसा हाई कोर्ट के निर्देश पर रत्न भंडार का भौतिक निरीक्षण किया जाना था लेकिन रत्न भंडार की चाबियां नहीं मिलीं। इससे भौतिक निरीक्षण नहीं हो सका।

अगले दिन यानी 5 अप्रैल को मंदिर समिति की बैठक में यह बात सामने आई कि रत्न भंडार की चाबियां गुम हैं। इसके बाद राज्यभर में आक्रोश फैल गया। पुरी के जिला कलेक्टर रत्न भंडार के पदेन संरक्षक होते हैं। इसलिए यह मामला और विकराल हो गया। मामले में बढ़ते हंगामे को देखते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 4 जून 2018 को इसकी न्यायिक जांच के आदेश दिए। इसके कुछ दिनों बाद पुरी के जिला कलेक्टर के दफ्तर से एक लिफाफा मिला था जिसपर लिखा था 'आंतरिक रत्न भंडार की डुप्लिकेट चाबियां'। बाद में 29 नवंबर, 2018 को न्यायिक जांच आयोग ने 324 पन्नों की अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी लेकिन तब से ओडिशा सरकार ने उसे सार्वजनिक नहीं किया है। पिछले साल मंदिर समिति ने सरकार से अनुरोध किया है कि 2024 में वार्षिक जगन्नाथ यात्रा के दौरान रत्न भंडार खोला जाय।

क्या हैं आरोप और राजनीति?
भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की चाबियां एक व्यापक भावनात्मक और सियासी मुद्दा भी रहा है। आरोप है कि दुर्भावनापूर्ण तरीके से राज्य सरकारों ने जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार से अकूत धन निकाला है और उसका दुरुपयोग किया है। मौजूदा चुनावों में इसी बहाने भाजपा मौजूदा बीजद और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को भी कठघरे में खड़ा करना चाह रही है। चूंकि भगवान जगन्नाथ ओडिशा में सबसे प्रतिष्ठित और पूजनीय देवता हैं और राज्य में 90 फीसदी आबादी हिन्दुओं की है, इसलिए भाजपा इसी बहाने हिन्दुओं के भावनात्मक मुद्दे को उछालकर उन्हें लामबंद करना चाहती है। भाजपा अब सवाल उठा रही है कि मंदिरों की संपत्ति पर किसका नियंत्रण हो इस पर देशव्यापी बहस होनी चाहिए।

ओडिशा से तमिलनाडु तक सियासत क्यों गर्म?
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी वी के पांडियन ने कहा है कि जनन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की गुम हुईं चाबियों के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास “कुछ जानकारी” है तो उन्हें चाबियां ढूंढनी चाहिए। मोदी ने पांडियन के तमिल मूल का संदर्भ देते हुए हाल में एक चुनावी रैली में कहा था कि चाबियां तमिलनाडु जा सकती हैं । इस पर पलटवार करते हुए पांडियन ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री को इतना जानकारी है तो उन्हें पता लगाना चाहिए कि चाबियां कहां गईं... मैं माननीय प्रधानमंत्री से विनम्र निवेदन करूंगा। उनके अधीन इतने सारे अधिकारी हैं, उन्हें कुछ जानकारी तो होगी ही। वह ओडिशा के लोगों की भी जानकारी बढ़ा सकते हैं।” उन्होंने कहा, “ वह राजनीतिक बयान दे रहे हैं इसलिए हम इसे उसी तरह लेंगे।” पांडियन पूर्व नौकरशाह हैं और वर्षों तक पटनायक के विश्वस्त रहे हैं तथा अब बीजद के स्टार प्रचारक हैं।

पलटवार करते हुए पांडियन ने यह भी कहा कि रत्न भंडार का आंतरिक कक्ष लगभग चार दशकों से नहीं खोला गया है। इनमें से एक दशक ऐसा था जब भाजपा के मंत्री इस मुद्दे को देख रहे थे। उन्होंने कहा, “तो शायद उन्हें पता लगाना चाहिए कि चाबियां कहां हैं।” यह पूछे जाने पर कि क्या रत्न भंडार खोला जाएगा, पांडियन ने कहा, "बिल्कुल, तारीख तय हो गई है।" हालांकि, उन्होंने विस्तार से नहीं बताया।

उधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने ओडिशा में भगवान जगन्नाथ मंदिर के कोषागार की गायब चाबियों को लेकर प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री वोटों की खातिर तमिलों को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने रत्न भंडार की चाबियों के गायब होने पर प्रधानमंत्री की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा, ''यह करोड़ों लोगों द्वारा पूजे जाने वाले भगवान जगन्नाथ का अपमान करने के साथ-साथ तमिलनाडु के लोगों का भी अपमान है, जो ओडिशा राज्य के साथ अच्छे संबंध और मित्रता रखते हैं।''

स्टालिन ने पूछा, ''क्या प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु के लोगों को मंदिर का खजाना चुराने वाले चोरों के तौर पर अपमानित कर सकते हैं...क्या यह तमिलनाडु का अपमान नहीं है? तमिलों के प्रति इतनी नापसंदगी और नफरत क्यों है?'' स्टालिन ने कहा, ''प्रधानमंत्री को वोटों के लिए तमिलनाडु और तमिलों को बदनाम करना बंद करना चाहिए।'