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रिंकल्स अच्छे हैं...क्या है CSIR का अनूठा 'WAH मंडे' अभियान; बिना प्रेस किए कपड़े क्यों पहन रहे वैज्ञानिक?

CSIR new initiative to combat Climate Change: CSIR के वैज्ञानिकों ने अनूठी पहल करते हुए फैसला किया है कि वे सभी सप्ताह में एक दिन यानी सोमवार को बिना आयरन किए हुए कपड़े पहनेंगे, जिस पर भले रिंकल्स हो।

रिंकल्स अच्छे हैं...क्या है CSIR का अनूठा 'WAH मंडे' अभियान; बिना प्रेस किए कपड़े क्यों पहन रहे वैज्ञानिक?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 08 May 2024 10:15 PM
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Wrinkles Acche Hain:  देश के प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंन्डस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के वैज्ञानिकों ने अनूठी पहल करते हुए 'WAH Monday'अभियान की शुरुआत की है। WAH का मतलब Wrinkles Acche Hain (रिंकल्स अच्छे हैं)। यानी CSIR के वैज्ञानिकों ने अनूठी पहल करते हुए फैसला किया है कि वे सभी सप्ताह में एक दिन यानी सोमवार को बिना आयरन किए हुए कपड़े पहनेंगे, जिस पर भले ही रिंकल्स हो। वैज्ञानिकों ने ये पहल जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए की है।

CSIR की पहली महिला महानिदेशक डॉ. एन कलैसेलवी ने कहा कि 'WAH मंडे' ऊर्जा साक्षरता की दिशा में एक बड़े अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा, "CSIR ने सोमवार को बिना इस्त्री किए कपड़े पहनकर इस अभियान में योगदान देने का फैसला किया है। हर एक जोड़ी कपड़े को इस्त्री करने पर 200 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इसलिए, बिना इस्त्री किए कपड़े पहनकर, एक दिन में एक व्यक्ति द्वारा कम से कम 200 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा सकता है।"

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक 1 से 15 मई के बीच स्वच्छता पखवाड़े के तहत  CSIR  में  रिंकल्स अच्छे हैं अभियान की शुरुआत की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा संरक्षण की अपनी बड़ी पहल के तहत, CSIR देश भर की सभी प्रयोगशालाओं में बिजली की खपत को कम करने के लिए कुछ मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को लागू करने जा रहा है। इसका शुरुआती लक्ष्य कार्य स्थलों पर बिजली बिल में 10 फीसदी की कमी करना है। CSIR ने बताया कि इन SOPs को पायलट ट्रायल के तौर पर जून-अगस्त 2024 के दौरान लागू किया जाएगा।

बता दें कि CSIR ने अभी हाल ही में देश की सबसे बड़ी जलवायु घड़ी (Climate Clock) दिल्ली के रफी मार्ग स्थित अपने दफ्तर में लगाई है। CSIR महानिदेशक कलैसेल्वी कहती हैं कि यह धरती माता और इस ग्रह को बचाने की दिशा में सीएसआईआर की एक छोटी सी कोशिश है।

CSIR की देशभर में 37 प्रयोगशालाएं हैं। इनमें 3521 वैज्ञानिक और 4162 तकनीकी और सहायक कर्मचारी काम करते हैं। CSIR के ये वैज्ञानिक और कर्मचारी अगर हफ्ते में एक दिन बिना प्रेस किए हुए कपड़े पहनेंगे तो वे एक दिन में 1536.6 किलो, एक हफ्ते में 10,756.2 किलो, एक महीने में 46,098 किलो और एक साल में 4,79,419.2 किलो कार्बन का उत्सर्जन रोक सकते हैं।