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29 अक्तूबर, 2020|1:03|IST

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भारत और अमेरिका BECA पर करेंगे साइन, जानिए क्यों और कैसे देश के दुश्मनों की बढ़ेगी टेंशन

 india and us come to increase defense cooperation in the indian pacific

अमेरिका विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ और रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर भारत आ चुके हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री तीसरी '2+2' मंत्री स्तरीय बैठक के लिए आए हैं। भारत और अमेरिका मंगलवार को बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन अग्रीमेंट (BECA) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। एलएसी पर तनाव के बीच दोनों देशों में होने जा रहे इस समझौते से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की टेंशन बढ़ जाएगी। आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्या है यह समझौता और कैसे इससे देश की ताकत बढ़ने वाली है। 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष मार्क टी एस्पर ने सोमवार को मुलाकात के दौरान इस बात पर संतोष जाहिर किया कि दोनों देशों के बीच मंगलवार को BECA हस्ताक्षर किया जाएगा। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और बढ़ावा देने के लिए लंबे समय से लंबित BECA समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इस समझौते के तहत दोनों देश अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, साजोसामान और भू-स्थानिक मानचित्र (जियोस्पेशल मैप) साझा कर सकेंगे।

BECA भारत और अमेरिका के बीच चार मूलभूत समझौतों में से अंतिम है, जिससे दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स और सैन्य सहयोग बढ़ेगा। इनमें से पहला समझौता 2002 में हुआ था जो सैन्य सूचना की सुरक्षा से संबंधित था। दो अन्य समझौते 2016 और 2018 में हुए जो लॉजिस्टिक्स और सुरक्षित संचार को लेकर थे। 

BECA समझौता भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में मील का पत्थर माना जा रहा है। इस समझौते के बाद भारत अमेरिका के जियोस्पेशल मैप्स और क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकेगा, जिससे ऑटोमेटेड हार्डवेयर सिस्टम्स और क्रूज-बैलिस्टिक मिसाइलों सहित हथियारों की सटीकता बढ़ जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह भारत द्वारा अमेरिका से हथियारों से लैस मानव रहित हथियारों (UAVs) की खरीद के लिए भी आधार का काम करेगा। 

ये UAVs दुश्मनों पर आसमान से हमले के लिए अमेरिका के जियोस्पेशल डेटा पर निर्भर करते हैं। यह समझौता ऐसे समय पर होने जा रहा है जब  भारत अमेरिका से 30 जनरल एटॉमिक्स एमक्यू -9 गार्जियन ड्रोन खरीदने पर विचार कर रहा है। अमेरिका और भारत के बीच पहले भी खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान हो चुका है। 2017 में डोकलाम में चीन के साथ तनातनी के दौरान अमेरिका ने कथित तौर पर भारतीय सेना को चाइनीज सैनिकों के मूवमेंट की खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी।

यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब भारत का चीन के साथ सीमा पर गतिरोध जारी है और इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। अमेरिका पिछले कुछ महीनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर चीन की काफी आलोचना करता रहा है। इन मुद्दों में भारत के साथ सीमा विवाद, दक्षिण चीन सागर में उसकी बढ़ती सैन्य आक्रामकता, और हांगकांग में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों से निपटने के तरीके शामिल हैं।

पोम्पिओ की यात्रा से पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका भारत के एक प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने का स्वागत करता है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "अमेरिका एक प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उभरने का स्वागत करता है। अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आगामी कार्यकाल के दौरान भारत के साथ निकट सहयोग के लिए उत्सुक है।''

अमेरिका ने रक्षा व्यापार और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को अपने निकटतम सहयोगियों के स्तर तक ले जाने की मंशा दिखाते हुए जून 2016 में भारत को "प्रमुख रक्षा सहयोगी" नामित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तंत्र को मंजूरी दिए जाने के बाद सितंबर 2018 में दिल्ली में पहली 'टू प्लस टू बैठक हुई थी। बैठक का दूसरा संस्करण पिछले साल दिसंबर में वॉशिंगटन में आयोजित हुआ था।

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  • Web Title:what is BECA agreement between india us benefits of Basic Exchange and Cooperation Agreement