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कोविशील्ड लगवाने वालों को क्या-क्या होता है? भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने पहले ही कर दिया था 'खुलासा'

भारत में सीरम ने कोविशील्ड नाम से जो वैक्सीन बनाई थी, वह एस्ट्राजेनेका का ही फॉर्मूला है। यानी एस्ट्राजेनेका ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर भारत को कोविशील्ड टीकों की सप्लाई की थी।

कोविशील्ड लगवाने वालों को क्या-क्या होता है? भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने पहले ही कर दिया था 'खुलासा'
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 08 May 2024 10:29 PM
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दुनियाभर में इस वक्त कोरोना की वैक्सीन को लेकर बवाल मचा हुआ है। तरह-तरह के डराने और चौंकाने वाले दावे किए जा रहे हैं। ये पूरा मामला ब्रिटिश दवा कंपनी ‘एस्ट्राजेनेका’ के एक अदालती खुलासे के बाद सामने आया है। दरअसल ब्रिटेन की इस दवा कंपनी ने एक अदालत के समक्ष स्वीकार किया था कि उनकी कोविशील्ड वैक्सीन के दुर्लभ प्रभाव हो सकते हैं। फार्मा कंपनी ने माना है कि उनकी कोविशील्ड वैक्सीन कई दुर्लभ मामलों में खून के थक्के जमने और प्लेटलेट काउंट कम होना का भी कारण हो सकती है। 

भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ने बनाई थी कोविशील्ड 

भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ने कोविशील्ड नाम से जो वैक्सीन बनाई थी, वह एस्ट्राजेनेका का ही फॉर्मूला है। यानी एस्ट्राजेनेका ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के साथ मिलकर भारत को कोविशील्ड टीकों की सप्लाई की थी। एस्ट्राजेनेका ने कोविड-19 टीके विकसित करने के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी की थी। इन टीकों को भारत में कोविशील्ड और यूरोप में ‘वैक्सजेवरिया’ के नाम से बेचा गया था।

इस पूरे मामले पर सीरम इंस्टीट्यूट का भी बयान सामने आया है। सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा है कि उसके सभी प्रोडक्ट पैकेजिंग में टीटीएस सहित "सभी दुर्लभ से बहुत दुर्लभ दुष्प्रभावों का खुलासा" पहले ही किया गया था। कंपनी ने बुधवार को ये भी कहा कि वैक्सीन की सुरक्षा "सर्वोपरि बनी हुई है।" इसने कहा कि कोविशील्ड जैसी दवा "दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाने में सहायक" रही है। बता दें कि एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन और थ्रोम्बोसिस के बीच थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) के साथ संबंध को स्वीकार किया है, जो ऐसी चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें असामान्य रूप से प्लेटलेट्स का स्तर कम होता है और रक्त के थक्के बनते हैं। एस्ट्रेजेनेका ने ब्रिटेन की अदालत में माना है कि उसकी वैक्सीन से दुर्लभ मामलों में थ्रॉम्बोटिक थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी टीटीएस जैसे साइडइफेक्ट हो सकते हैं।

हमने पहले ही बता दिया था- सीरम इंस्टीट्यूट 

इस पर सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा, "हम इन चिंताओं को पूरी तरह से समझते हैं। ऐसे में हमारे लिए पारदर्शिता और सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पर जोर देना महत्वपूर्ण है। शुरुआत से ही, हमने 2021 में पैकेजिंग इंसर्ट में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के साथ थ्रोम्बोसिस सहित सभी दुर्लभ से दुर्लभ दुष्प्रभावों का खुलासा किया था।" दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता भारतीय कंपनी ने कहा कि उन्होंने ''कोरोना के नए वैरिएंट्स के म्यूटेशन के कारण'' दिसंबर 2021 से कोविशील्ड का निर्माण बंद कर दिया था। कंपनी ने कहा, ''इसके परिणामस्वरूप पिछले टीकों की मांग काफी कम हो गई थी। भारत में 2021 और 2022 में सबसे ज्यादा टीकाकरण दर हासिल की गई थी। इसके साथ-साथ नए म्यूटेट वैरिएंट्स सामने आए थे, इन वजहों से पिछले टीकों की मांग काफी कम हो गई। नतीजतन, दिसंबर 2021 से, हमने कोविशील्ड की अतिरिक्त खुराक का निर्माण और आपूर्ति बंद कर दी।" 

महामारी के सबसे बुरे दौर में अधिकांश टीके कोविशील्ड से ही लगाए गए थे। भारत में, कोविड-19 टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराकें दी गई हैं और उनमें से अधिकांश कोविशील्ड थीं। सीरम का बयान ऐसे समय में आया है जब एस्ट्राजेनेका को यूनाइटेड किंगडम में बहुत बड़े मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल एक मरीज ने दावा किया था कि उसने अप्रैल 2021 में कोविशील्ड वैक्सीन लगवाई थी। इसके बाद खून का थक्का बनने के कारण उसका मस्तिष्क हमेशा के लिए बेकार हो गया।