DA Image
30 नवंबर, 2020|5:46|IST

अगली स्टोरी

ओवैसी की AIMIM दे सकती है झटका? जानें कैसे है बंगाल में कांग्रेस के सामने सियासी जमीन बचाए रखने की चुनौती

congress leader gohil says gandhi family never has ambition for power sonia and rahul gandhi have re

1 / 2PTI File Photo

bengal chief minister mamata banerjee and congress president sonia gandhi have jointly convened a me

2 / 2Bengal chief minister Mamata Banerjee and Congress president Sonia Gandhi have jointly convened a meeting of chief ministers of non-BJP ruled states on Wednesday to demand postponement of NEET, JEE. (PTI PHOTO.)

PreviousNext

बिहार विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस में उठ रही समीक्षा की मांग को लेकर घमासान जारी है। पार्टी नेता अपने-अपने फायदे-नुकसान के हिसाब से सवाल उठा रहे हैं। इस बीच, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अंदर भी बिहार चुनाव से सबक लेने की मांग जोर पकड़ रही है। बंगाल कांग्रेस का कहना है कि पार्टी को बिहार में एआईएमआईएम के प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस लंबे वक्त से सत्ता से बाहर है। पार्टी का जनाधार कुछ जिलों तक सीमित है। इनमें वीरभूम, मुर्शिदाबाद और मालदा शामिल हैं। अहम बात यह है कि इन जिलों की गिनती मुसलिम बहुल क्षेत्रों में होती है। एआईएमआईएम की नजर भी इन जिलों पर है। ऐसे में पार्टी को तमाम पहलुओं पर विचार करते हुए विधानसभा चुनाव रणनीति को अंतिम रूप देना चाहिए।

वर्ष 2011 के चुनाव में कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों पार्टियों ने मुर्शिदाबाद की 22 सीट में से 15 सीट पर जीत दर्ज की थी। इनमें 14 कांग्रेस और एक तृणमूल के खाते में गई थी। जबकि सात सीट पर लेफ्ट ने जीत दर्ज की थी। पर वर्ष 2016 के चुनाव में तस्वीर बदल गई। इन चुनाव में कांग्रेस-लेफ्ट का गठबंधन था, पर तृणमूल का प्रदर्शन बेहतर रहा।

मालदा में भी कांग्रेस का दबदबा रहा है। वर्ष 2014 के चुनाव में मौसम नूर ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। पर बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गई। ऐसे में मालदा में भी पार्टी की स्थिति बहुत मजबूत नहीं रही है। वीरभूम और मिदनापुर में भी पार्टी की स्थिति पहले के मुकाबले कमजोर हुई है। ऐसे में एआईएमआईएम चुनाव लड़ती है, तो बिहार की तरह कांग्रेस को नुकसान ज्यादा हो सकता है।

प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुसलिम मतदाता के रुझान को समझने के लिए बिहार की समीक्षा बहुत जरूरी है। तृणमूल कांग्रेस के पास कई मुसलिम चेहरे हैं। ऐसे में हो सकता है कि मुसलिम मतदाता टीएमसी का साथ दे, पर इससे पार्टी को ज्यादा नुकसान होगा। क्योंकि, सीट पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा बढ़ जाएगा। इसलिए, पार्टी को सभी पहलुओं पर विचार कर निर्णय लेना चाहिए।
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:West Bengal Assembly Election Congress may Faces difficulties from AIMIM in bengal chunav TMC BJP Mamata Banerjee