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WATER CRISIS: पानी के लिए भारत-पाकिस्तान में बढ़ सकता है तनाव

पाकिस्तान के करांची में पानी के लिए बेहाल लोग(Bloomberg)

भारत और पड़ोसी पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका है। पाकिस्तान के कराची समेत कई शहर और गांवों में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। यहां के लोग पानी की तलाश में रोज मिलों पैदल चलते हैं। एक शोध के अनुसार, भारत में तीन-चौथाई लोगों के पास साफ पानी की उपलब्धता नहीं है। देश का 70 फीसदी पानी प्रदूषित हो चुका है। ऐसे में देनों देशों के बीच विवाद गहरा सकता है। 

पानी को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका के पर ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश एक-दूसरे पर सिंधु जल संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हैं। ताजा विवाद पनबिजली परियोजना को लेकर है। इस परियोजना के लिए भारत चिनाब नदी पर काम कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि यह परियोजना जल संधि का उल्लंघन है। इससे पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का निर्माण जारी रहने की प्रतिबद्धता जताई है।

अब चुनाव पास आने के कारण इस विवाद का अंत कैसे होगा यह कह पाना मुश्किल है। रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन में वूड्रो विल्सन सेंटर में साउथ एशिया मामलों के सीनियर एसोसिएट माइकल कुगेलमैन ने एक ईमेल के जवाब में कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के कारण सिंधु जल संधि की यह सबसे बड़ी परीक्षा साबित होगी। हालांकि, इस समय भारत और पाकिस्तान के रिश्ते स्थिर हैं और कुछ हद तक सकारात्मक भी दिख रहे हैं। 

पानी को लेकर अभी तक नहीं हुई जंग

सिंधु जल संधि के कारण अब तक दोनों देशों ने पानी को लेकर कोई जंग नहीं लड़ी है। पानी को लेकर दोनों देशों के बीच जंग रोकने में सिंधु जल संधि की अहम भूमिका है। कुगेलमैन ने कहा कि दोनों देशों के बीच पानी जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को लेकर हालात बिगड़ने के बाद दक्षिण एशिया ही नहीं पूरी दुनिया पर असर पड़ सकता है। 

खतरनाक हो सकते हैं परिणाम

भारत-पाकिस्तान की सरकारें अगर पानी का प्रबंधन करने में विफल रहती हैं तो इसके खतरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खुद दो बड़े बांध बनाने के लिए 17 अरब डॉलर की राशि जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें से एक बांध कब्जे वाले कश्मीर में बनाने की योजना है। पानी के मसले पर चर्चा के दौरान पिछले साल पाकिस्तानी फौज के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था, भविष्य में होने वाली जंग इन्हीं मुद्दों पर लड़ी जाएगी। 

पानी को हथियार बनाएंगे मोदी

स्वीडन की उप्सला यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल वॉटर कोऑपरेशन के प्रफेसर अशोक स्वैन का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोबारा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनते हैं तो वे पानी को हथियार बनाएंगे। पाकिस्तान के साथ संबंध खराब हुए तो वर्ष 2020-21 में इसे पाकिस्तान को घुटनों पर लाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 

संधि में छह नदियों के जल का बंटवारा 

सिंधु जल संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे। 12 जनवरी 1961 से संधि की शर्तें लागू कर दी गईं थीं। संधि के तहत छह नदियों के पानी का बंटवारा तय हुआ, जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं। तीन पूर्वी नदियों (रावी, व्यास और सतलज) के पानी पर भारत का पूरा हक दिया गया। बाकी तीन पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) के पानी के बहाव को बिना बाधा पाकिस्तान को देना था। 

पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल आएगा भारत

पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल सिंधु जल संधि के तहत 28 से 31 जनवरी के बीच निरीक्षण करने के लिए जम्मू-कश्मीर के चेनाब बेसिन का दौरा करेगा। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान के सिंधु (नदी) आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह अपने दो सलाहकारों के साथ भारत आएंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए सिंधु जल संधि के तहत यह यात्रा की जाती है। संधि के तहत दोनों देशों के आयुक्तों को सिंधु बेसिन के दोनों ओर के क्षेत्र का पांच साल में एक बार निरीक्षण करने का अधिकार प्राप्त है। इस संधि पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों तरफ आयोग की अब तक ऐसी 118 यात्राएं हो चुकी हैं। सिंधु जल संधि के तहत सिंधु की तीन सहायक नदियां- सतलुज, ब्यास और रावी का जल भारत को आवंटित किया गया है, जबकि चेनाब, झेलम और सिंधु का जल पाकिस्तान को आवंटित किया गया।

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